
gmedianews24.com/ नई दिल्ली | आज यानी 8 मार्च 2026 को देशभर में उमंग और उत्साह के साथ रंग पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार मुख्य रूप से देवताओं को समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जहाँ धुलेंडी पर इंसान एक-दूसरे को रंग लगाते हैं, वहीं रंग पंचमी के दिन हवा में गुलाल उड़ाकर देवताओं का आह्वान किया जाता है।
क्यों खास है रंग पंचमी?
धार्मिक दृष्टि से इस दिन का विशेष महत्व है। माना जाता है कि आज के दिन हवा में उड़ता हुआ गुलाल ‘रज’ और ‘तम’ गुणों को नष्ट कर ‘सत्व’ गुणों का प्रसार करता है। इससे वातावरण में सकारात्मकता आती है और कुंडली के दोषों का शमन होता है।
पूजन के लिए आवश्यक सामग्री (Checklist)
पूजा शुरू करने से पहले इन सामग्रियों को एकत्रित कर लें:
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देव प्रतिमा: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति।
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रंग और गुलाल: विशेषकर लाल, पीला और गुलाबी गुलाल।
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गंगाजल और कलश: शुद्धिकरण के लिए।
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भोग: मिश्री, बताशे, खीर या घर में बना शुद्ध पकवान।
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अन्य: कुमकुम, अक्षत (चावल), चंदन, धूप-दीप और ताजे फूल।
स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि
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स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
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वेदी की स्थापना: पूजा घर में एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर श्री हरि और मां लक्ष्मी की स्थापना करें।
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अभिषेक: भगवान को गंगाजल अर्पित करें और तिलक लगाएं।
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रंग अर्पण: सबसे पहले भगवान के चरणों में गुलाल अर्पित करें। ध्यान रहे कि देवताओं को केवल प्राकृतिक रंगों का ही भोग लगाएं।
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धूप-दीप: घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती से वातावरण को सुगंधित करें।
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गुलाल उड़ाना: पूजा के बाद घर के बाहर या आंगन में आकाश की ओर गुलाल उड़ाएं। ऐसी मान्यता है कि इससे देवता प्रसन्न होकर आशीर्वाद बरसाते हैं।
शक्तिशाली पूजन मंत्र
पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:
“ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद, ॐ श्रीं h्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥”
भगवान विष्णु के लिए:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”
शुभ मुहूर्त
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पंचमी तिथि प्रारंभ: 7 मार्च 2026, शाम से।
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पंचमी तिथि समाप्त: 8 मार्च 2026, देर रात तक।







