क्या कहा उन्होंने?
शहबाज़ शरीफ ने कहा कि जब वह और पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनिर विदेशी देशों का दौरा करते हैं तो उन्हें “भीख मांगने जैसा महसूस” होता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोन लेना देश की आत्म‑इज्जत पर बोझ डालता है और देश को ऐसे समझौते करने पड़ते हैं जो उसकी नीति पर असर डाल सकते हैं।
आर्थिक संकट और कारण
शाहबाज़ ने यह भी बताया कि देश की विदेशी मुद्रा भंडार बेहतर हुआ है, लेकिन इसमें बड़े पैमाने पर विदेशियों से लिए गए लोन शामिल हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान IMF और मित्र देशों के साथ वित्तीय सहायता योजनाओं पर बातचीत कर रहा है ताकि आर्थिक संकट से निपटा जा सके।
Voices from the Ground / Official Statements
“जब हमें दुनिया भर में लोन मांगने जाना पड़ता है, तो हमें शर्म महसूस होती है। यह हमारे आत्म‑सम्मान पर भारी पड़ता है।”
— शहबाज़ शरीफ, प्रधानमंत्री, पाकिस्तान
क्या प्रभाव पड़ेगा?
शरीफ की टिप्पणी से यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियां गहरी हैं। विदेशों से ऋण लेने की जरूरत ने देश की नीतियों पर प्रभाव डाला है। इससे दोनों देशों — चीन और सऊदी अरब, UAE जैसे मित्र देशों के साथ बातचीत की दिशा भी प्रभावित हो सकती है। आम नागरिकों के लिए महंगाई और रोजगार जैसे मुद्दे आगे भी मुख्य चिंता बने रहेंगे।







