
PM Narendra Modi , अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने गुजरात दौरे के दूसरे दिन विश्वविख्यात सोमनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को नमन किया। इसके बाद वे ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अंतर्गत आयोजित भव्य शौर्य यात्रा में शामिल हुए, जहां हाथों में डमरू और 108 घोड़ों के अलौकिक जुलूस ने पूरे वातावरण को वीरता और आस्था से ओतप्रोत कर दिया।
यह स्वाभिमान पर्व सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास, उसके पुनर्निर्माण और विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध संघर्ष करते हुए बलिदान देने वाले वीर योद्धाओं की स्मृति को समर्पित रहा। शौर्य यात्रा में पारंपरिक परिधान, ढोल-नगाड़ों की गूंज, वैदिक मंत्रोच्चार और ऐतिहासिक झांकियों के माध्यम से भारत की सनातन संस्कृति और शौर्य परंपरा का भव्य प्रदर्शन किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत के आत्मसम्मान, आस्था और पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने वीर योद्धाओं के बलिदान को याद करते हुए कहा कि उनकी तपस्या और संघर्ष ने भारत की सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण रखा।
शौर्य यात्रा में शामिल 108 घोड़े सनातन परंपरा और शिव तत्व के प्रतीक माने गए, जबकि डमरू की ध्वनि ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। पीएम मोदी स्वयं इस सांस्कृतिक यात्रा का हिस्सा बने, जिससे उपस्थित श्रद्धालुओं और जनसमूह में विशेष उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम के दौरान गुजरात की लोक कला, शास्त्रीय नृत्य और ऐतिहासिक कथाओं पर आधारित प्रस्तुतियों ने लोगों का मन मोह लिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत और स्थानीय नागरिक इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के जरिए न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त संदेश दिया गया, बल्कि नई पीढ़ी को भारत के गौरवशाली इतिहास और वीर परंपरा से जोड़ने का प्रयास भी किया गया। यह आयोजन गुजरात ही नहीं, बल्कि पूरे देश में सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बनकर उभरा।







