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Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के ठीक 48 घंटे बाद सूर्य ग्रहण का साया, निशिता काल पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां

नई दिल्ली/काशी | हिंदू कैलेंडर के अनुसार, साल 2026 की महाशिवरात्रि खगोलीय और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होने जा रही है। आज यानी 15 फरवरी को देशभर में महादेव का महापर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है, लेकिन इसके ठीक 48 घंटे बाद, 17 फरवरी को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार, महाशिवरात्रि जैसे महापर्व और ग्रहण के बीच इतना कम अंतराल ब्रह्मांडीय ऊर्जा में भारी उथल-पुथल का संकेत है।

17 फरवरी को ‘रिंग ऑफ फायर’: जानें समय

मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण एक ‘एनुअल’ (Annular) सूर्य ग्रहण होगा, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ भी कहा जाता है।

  • समय: ग्रहण दोपहर 03:26 बजे शुरू होगा और शाम 07:57 बजे समाप्त होगा।

  • दृश्यता: हालांकि यह ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा और भारत में अदृश्य रहेगा, लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसार इसका प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा।

निशिता काल पूजा: शिव साधना का महापर्व

महाशिवरात्रि की सबसे प्रमुख पूजा निशिता काल (अर्धरात्रि) में की जाती है। इस वर्ष निशिता काल का शुभ मुहूर्त 16 फरवरी की रात 12:09 AM से 01:01 AM तक रहेगा। ग्रहण से ठीक पहले की इस ऊर्जावान रात में पूजा करते समय भक्तों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

सावधानी नोट: चूंकि ग्रहण 48 घंटे बाद है, इसलिए सूतक काल का सीधा प्रभाव शिवरात्रि की पूजा पर नहीं पड़ेगा, परंतु ब्रह्मांडीय ऊर्जा में बदलाव के कारण साधना में एकाग्रता और शुद्धि का विशेष महत्व है।

पूजा में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां

  1. अशुद्ध अवस्था में स्पर्श: निशिता काल की पूजा अत्यंत संवेदनशील होती है। बिना स्नान किए या अशुद्ध वस्त्रों में शिवलिंग का स्पर्श न करें।

  2. तुलसी दल का प्रयोग: भगवान शिव की पूजा में तुलसी का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है, इसे भूलकर भी अर्पित न करें।

  3. हल्दी और कुमकुम: शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ाई जाती क्योंकि यह स्त्री तत्व का प्रतीक मानी जाती है। केवल चंदन का लेप लगाएं।

  4. तामसिक भोजन: महाशिवरात्रि से लेकर ग्रहण की समाप्ति तक सात्विक आहार ही लें। मांस, मदिरा या प्याज-लहसुन का सेवन साधना के फल को नष्ट कर सकता है।

  5. नकारात्मक विचार: ग्रहण पूर्व की ऊर्जा मानसिक तनाव बढ़ा सकती है, अतः पूजा के दौरान क्रोध या किसी के प्रति ईर्ष्या का भाव न रखें।

ज्योतिषीय महत्व: ग्रहण योग का प्रभाव

ज्योतिषियों के अनुसार, सूर्य अभी कुंभ राशि में गोचर कर रहे हैं जहाँ राहु पहले से मौजूद हैं, जिससे ‘ग्रहण योग’ बन रहा है। महाशिवरात्रि पर शिव की आराधना इस दोष के नकारात्मक प्रभावों को कम करने का सबसे उत्तम मार्ग है। महाशिवरात्रि की रात को किया गया ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जाप आने वाले सूर्य ग्रहण के कष्टों से मुक्ति दिला सकता है।

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