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Jivitputrika Vrat 2023: जीवित्पुत्रिका व्रत कब है? जानिए क्यों रखा जाता है ये व्रत

gmedianews24( source) : हर साल अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत पड़ता है. इसे जिउतिया और जितिया व्रत भी कहा जाता है. यह त्योहार खासकर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है. यह व्रत पुत्रों को समर्पित है. मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को विधि विधान से रखने पर पुत्रों को दीर्घायु होने का वरदान मिलता है साथ ही उनके जीवन में सुख समृद्धि आती है.

जीवित्पुत्रिका व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त 

इस साल जीवित्पुत्रिका व्रत 6 अक्टूबर, शुक्रवार के दिन रखा जाएगा. इस दिन अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 46 मिनट से शरू होगा और दोपहर 12 बजकर 33 मिनट पर खत्म होगा. वहीं ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 38 मिनट से शुरू होगा और 05 बजकर 28 पर खत्म होगा. अष्टमी तिथि का प्रारंभ  6 अक्टूबर, सुबह 6 बजकर 34 मिनट से होगा और इसकी समाप्ति 7 अक्टूबर को सुबह 08 बजकर 08 मिनट पर  होगी.

जीवित्पुत्रिका व्रत का महत्व 

हिंदू धर्म में जीवित्पुत्रिका व्रत का विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन महिलाएं अपने पुत्रों की दीर्घायु और पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए 24 घंटे का निर्जला उपवास रखती हैं. जीवित्पुत्रिका व्रत को महिलाओं के सबसे कठिन व्रतो में से एक माना जाता है. माताएं अपने संतान की लंबी उम्र और सुख-शांति की कामना के लिए यह व्रत करती हैं. इस व्रत को करने से संतान के सभी कष्ट दूर होते हैं. यह व्रत तीन दिनों तक चलता है. इसकी शुरुआत नहाए खाए के साथ होती है. दूसरे दिन निर्जला व्रत और तीसरे दिन व्रत का पारण किया जाता है.

जीवित्पुत्रिका व्रत की पूजन विधि 

इस दिन माताएं ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करती हैं और व्रत का संकल्प लेती हैं. इसके बाद मड़वे की रोटी, दही, चूड़ा, चीनी और अन्य चीज तैयार प्रसाद को देवी देवताओं और अपने पूर्वजों को अर्पित किया जाता है. इसके बाद पूरा परिवार इस प्रसाद को ग्रहण करता है. प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रत करने वाली महिलाएं अगले 24 घंटे तक किसी भी तरीके का फल फूल या जल ग्रहण नहीं करती हैं. व्रत वाले दिन शाम के समय माताएं जिउतिया बंधन वाली कथाएं सुनती हैं. इसीलिए इस व्रत को काफी कठिन व्रत भी माना जाता है.

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