जया एकादशी 2026: आज गुरुवार का शुभ संयोग, इन महामंत्रों के जप से चमकेगी किस्मत और मिलेगी हर कार्य में ‘जय’

नई दिल्ली: आज पूरा देश ‘जया एकादशी’ का पर्व हर्षोल्लास के साथ मना रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी को ‘जया एकादशी’ कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन विधि-विधान से व्रत रखता है, उसे न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि मृत्यु के पश्चात पिशाच योनी जैसी बुरी गतियों से भी मुक्ति मिल जाती है।
गुरुवार का ‘महायोग’: क्यों है खास?
इस साल जया एकादशी गुरुवार (29 जनवरी) के दिन पड़ रही है। ज्योतिष शास्त्र में एकादशी और गुरुवार का मिलन अत्यंत मंगलकारी माना गया है। भगवान विष्णु को पीला रंग और गुरुवार का दिन अत्यंत प्रिय है। आज के दिन पूजा करने से कुंडली में ‘गुरु’ ग्रह मजबूत होता है, जिससे शिक्षा, करियर और वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
इन मंत्रों के जाप से प्रसन्न होंगे भगवान विष्णु
आज के दिन श्री हरि का आशीर्वाद पाने के लिए भक्त निम्नलिखित मंत्रों का जप कर सकते हैं:
-
मूल मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
-
विष्णु गायत्री मंत्र: ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
-
बृहस्पति मंत्र: चूँकि आज गुरुवार है, अतः देवगुरु बृहस्पति के 108 नामों का जाप करना विशेष फलदायी होगा।
जया एकादशी व्रत के नियम और लाभ
-
सात्विकता: आज के दिन पूर्णतः सात्विक भोजन (फलाहार) करना चाहिए और चावल के सेवन से बचना चाहिए।
-
दान का महत्व: आज के दिन पीले वस्त्र, चने की दाल और केले का दान करना शुभ माना जाता है।
-
विजय की प्राप्ति: जैसा कि नाम से स्पष्ट है ‘जया’, यह एकादशी शत्रुओं पर विजय और कार्यों में सफलता दिलाने वाली मानी गई है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
-
एकादशी तिथि प्रारंभ: 28 जनवरी, शाम से।
-
एकादशी तिथि समाप्त: 29 जनवरी, आज रात तक।
-
पारण का समय: कल यानी 30 जनवरी को सूर्योदय के बाद।
विशेष नोट: आज शाम तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाकर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करते हुए 11 परिक्रमा जरूर करें। इससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।







