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India-EU Trade Pact : यूरोपीय संघ के साथ भारत की ऐतिहासिक डील, अब सस्ते होंगे प्रीमियम स्पोर्ट्स गियर

gmedianews24.com/India-EU Trade Pact , नई दिल्ली — भारतीय खेल प्रेमियों और फिटनेस फ्रीक्स के लिए बड़ी खबर है। भारत और यूरोपीय संघ ने आज ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (Mother of All Deals) को अंतिम रूप दे दिया। इस समझौते के तहत भारत ने यूरोपीय संघ से आने वाले लगभग 96% सामानों पर टैरिफ कम करने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस डील को वैश्विक व्यापार का नया अध्याय बताया है।

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स्पोर्ट्स गियर और फिटनेस सेक्टर पर असर

इस डील का सबसे बड़ा असर प्रीमियम स्पोर्ट्स ब्रांड्स और एथलेटिक गियर पर पड़ेगा। अब तक जर्मनी, फ्रांस और इटली जैसे देशों से आने वाले हाई-टेक रनिंग शूज, साइकलिंग गियर और प्रोफेशनल जिम इक्विपमेंट पर भारी ड्यूटी लगती थी। नए नियमों के मुताबिक, भारत इन उत्पादों पर टैरिफ को 10 साल की अवधि में धीरे-धीरे कम करेगा। पहले ही दिन से लगभग 30% व्यापार मूल्य पर टैरिफ राहत मिलना शुरू हो जाएगी।

दूसरी तरफ, जालंधर और मेरठ के खेल उत्पाद निर्माताओं के लिए यह चांदी होने वाली है। भारतीय स्पोर्ट्स गुड्स, जो अब तक यूरोप में 10% से 15% के आयात शुल्क का सामना करते थे, अब वहां शून्य ड्यूटी पर बिकेंगे। इससे भारतीय उत्पादों की कीमत वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धियों के बराबर हो जाएगी।

ट्रेड स्कोरकार्ड: प्रमुख बदलाव

सेक्टर मौजूदा टैरिफ नया टारगेट समय सीमा
भारतीय स्पोर्ट्स गुड्स (निर्यात) ~10-12% 0% तत्काल
यूरोपीय प्रीमियम कारें 110% 10% चरणबद्ध (5-10 वर्ष)
टेक्सटाइल और जर्सी 15% तक 0% तत्काल
जिम और स्पोर्ट्स मशीनरी 44% तक खत्म चरणबद्ध

क्या कहा दिग्गजों ने

“हमने इतिहास रच दिया है। यह डील 2 अरब लोगों के बाजार को जोड़ती है। यह भारतीय कौशल और यूरोपीय तकनीक का मेल है।” — नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री, भारत

“यह समझौता एक स्पष्ट संदेश है कि नियम-आधारित व्यापार ही भविष्य है। भारत और ईयू अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के ‘डबल इंजन’ हैं।” — उर्सुला वॉन डेर लेयेन, अध्यक्ष, यूरोपीय आयोग

आगे का रास्ता: खेल जगत में क्या बदलेगा?

यह समझौता ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजारों में टैरिफ वार की आशंका बढ़ रही है। भारत के लिए यह डील रणनीतिक बढ़त है। आने वाले समय में एडिडास (Adidas) और डेकाथलॉन (Decathlon) जैसे यूरोपीय दिग्गज भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का विस्तार करेंगे क्योंकि अब कंपोनेंट्स का आयात सस्ता हो जाएगा। एथलीटों के लिए इसका सीधा मतलब है—वर्ल्ड क्लास तकनीक अब आपकी पहुंच में और आपकी जेब के हिसाब से होगी।

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