
Importance of Cow Donation : हिंदू धर्म शास्त्रों में जीवन, मृत्यु और परलोक यात्रा का विवरण विस्तार से मिलता है। विशेष रूप से गरुड़ पुराण में यह वर्णन मिलता है कि मनुष्य के जीवन और मृत्यु के बाद उसकी आत्मा को कठिन परलोक यात्रा से गुजरना पड़ता है। इन शास्त्रों के अनुसार, मृत्यु से पूर्व किए गए कर्म और धार्मिक दान, जैसे कि गौ दान (गाय का दान), आत्मा के लिए इस यात्रा को सरल और सुरक्षित बना सकते हैं।
मृत्यु पूर्व गौ दान का महत्व
सनातन धर्म में यह मान्यता है कि जीवन के अंतिम समय में किया गया गौ दान आत्मा के लिए पुण्य और मुक्ति का मार्ग खोलता है। गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि मृत्यु के समय किए गए धार्मिक कर्म, विशेषकर गाय दान, यमलोक की कठिनाइयों को कम कर सकते हैं और आत्मा के लिए सुगम मार्ग सुनिश्चित करते हैं।
यमलोक की यात्रा और वैतरनी नदी
गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा को यमलोक पहुंचने के लिए कई कठिन रास्तों से गुजरना पड़ता है। इस यात्रा का सबसे भयानक और कष्टदायक हिस्सा है वैतरणी नदी।
वैतरणी नदी का वर्णन शास्त्रों में इस प्रकार किया गया है:
-
यह नदी रक्त, मवाद और गंदगी से भरी होती है।
-
इसमें भयंकर और भयभीत करने वाले जीव-जंतु रहते हैं।
-
पापी आत्माओं को इस नदी को तैर कर पार करना पड़ता है, जो अत्यंत कठिन और यातनापूर्ण होता है।
गरुड़ पुराण में यह भी बताया गया है कि धार्मिक दान और पुण्य कर्म, जैसे गौ दान, वैतरनी नदी को पार करने में आत्मा की मदद करते हैं।
गौ दान क्यों है आत्मा के लिए फायदेमंद
-
पुण्य की प्राप्ति: अंतिम समय में किया गया गौ दान आत्मा को पुण्य प्रदान करता है।
-
यातना में राहत: वैतरनी नदी और यमलोक की कठिनाइयों को आसान बनाता है।
-
मुक्ति का मार्ग: मृत्यु के बाद आत्मा के लिए सुगम और सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करता है।




