
gmedianews24.com/नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली में केरल के दो छात्रों से मारपीट की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा कि देश में किसी को हिंदी बोलने के लिए मजबूर करना या पारंपरिक वेशभूषा का मजाक उड़ाना बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
यह टिप्पणी उस घटना के संदर्भ में आई है, जिसमें दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास दो केरल के छात्रों के साथ मारपीट की गई थी। आरोप है कि छात्रों को हिंदी बोलने के लिए मजबूर किया गया और उनकी पारंपरिक पोशाक ‘लुंगी’ का मजाक उड़ाया गया।
सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा,
“हम एक देश हैं। भारत विविधताओं में एकता का प्रतीक है। किसी की भाषा, संस्कृति या पहनावे के कारण उसे निशाना बनाना शर्मनाक है।”
कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि ऐसे मामलों को सांस्कृतिक और नस्लीय भेदभाव की श्रेणी में गंभीरता से लिया जाना चाहिए। न्यायालय ने यह भी जोड़ा कि सरकार को ऐसे मामलों पर स्पष्ट नीति बनानी चाहिए, ताकि देश में रहने वाले सभी लोगों की सांस्कृतिक स्वतंत्रता और गरिमा सुरक्षित रहे।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में इस तरह के भेदभाव के मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें लोगों को भाषा, पहनावे या खान-पान के आधार पर निशाना बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब समाज में सांस्कृतिक सौहार्द और आपसी सम्मान की आवश्यकता और भी बढ़ गई है।





