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आंवला नवमी: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने का विशेष पर्व, जानिए इसका महत्व और कथा

gmedianews24.com/पूरे देश में कार्तिक मास की शुक्ल नवमी तिथि को आंवला नवमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आंवला का पेड़ भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

इस दिन भक्त आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर पूजा, भोजन और कथा श्रवण करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

आंवला नवमी की प्राचीन कथा

प्राचीन काल में कावेरी नदी के किनारे देवशर्मा नाम के एक ब्राह्मण रहते थे। उनके पुत्र ने कार्तिक मास में व्रत और पूजा करने से इनकार कर दिया, जिससे क्रोधित होकर पिता ने उसे चूहे का श्राप दे दिया। बाद में जब विश्वामित्र ऋषि अपने शिष्यों के साथ आंवले के पेड़ के नीचे कार्तिक माह का महात्म्य सुना रहे थे, तब उस कथा को सुनकर वह ब्राह्मण पुत्र चूहे के रूप से मुक्त होकर दिव्य शरीर धारण कर स्वर्ग चला गया।

 माता लक्ष्मी और आंवला नवमी का संबंध

मान्यता है कि एक बार माता लक्ष्मी पृथ्वी पर आईं और उन्होंने भगवान विष्णु व भगवान शिव की एक साथ पूजा करने का संकल्प लिया। विचार करने पर उन्होंने पाया कि आंवला वृक्ष में तुलसी और बेल—दोनों के गुण मौजूद हैं। तुलसी भगवान विष्णु को और बेल भगवान शिव को प्रिय है।
इसलिए माता लक्ष्मी ने आंवले के पेड़ की पूजा की और उसके नीचे भोजन बनाकर भगवान विष्णु व शिव को भोग लगाया। तभी से यह परंपरा शुरू हुई और इसे आंवला नवमी कहा जाने लगा।

 पूजा का महत्व

इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने से संतान, सुख-समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। ब्राह्मणों को भोजन कराना और स्वयं भी आंवले के नीचे भोजन करना शुभ माना गया है।

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