
gmedianews24.com/नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से उस मोड़ पर पहुंच रही है, जहां आम नागरिक की आय, खर्च करने की क्षमता और उपभोग पैटर्न में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। ग्लोबल एसेट मैनेजमेंट फर्म फ्रैंकलिन टेम्पलटन की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 2031 तक देश की प्रति व्यक्ति आय ₹4.63 लाख तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अब “लो इनकम” से “एस्पिरेशनल इकॉनमी” यानी आकांक्षा-प्रेरित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ चुका है।
आय में जबरदस्त बढ़ोतरी, खपत में उछाल की उम्मीद
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 के अंत तक ₹10 लाख से अधिक वार्षिक आय वाले परिवारों की संख्या 10 करोड़ हो जाएगी। 2013 में ऐसे परिवारों की संख्या मात्र 6 करोड़ थी। यानी एक दशक में 4 करोड़ नए परिवार मध्यमवर्गीय उपभोग से ऊपर के वर्ग में पहुंचे हैं, जो देश की कुल खपत का लगभग 40% हिस्सा संभालेंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि आय में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर खपत (Consumption) पर पड़ेगा। आने वाले वर्षों में कार, मकान, इलेक्ट्रॉनिक्स, एफएमसीजी और लक्जरी उत्पादों की बिक्री में तेज वृद्धि की संभावना है।
2010 से 2024 के बीच भारत की प्रति व्यक्ति आय लगभग दोगुनी होकर ₹2.41 लाख हो चुकी है। मौजूदा आर्थिक गति बनी रही तो 2031 तक यह आंकड़ा ₹4.63 लाख को पार कर जाएगा। इसका मतलब है कि हर भारतीय की खर्च करने की क्षमता दोगुनी होगी, जिससे ट्रैवल, हेल्थकेयर, एंटरटेनमेंट और प्रीमियम ब्रांड्स के क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा।





