मोबाइल पर भगवान की फोटो लगाना शुभ या अशुभ? जानिए धार्मिक और ऊर्जात्मक दृष्टिकोण

gmedianews24.com/नई दिल्ली। आज के डिजिटल युग में मोबाइल हर व्यक्ति के जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। कई लोग अपनी आस्था और श्रद्धा के प्रतीक के रूप में मोबाइल की वॉलपेपर या स्क्रीन पर भगवान की तस्वीर लगाते हैं। लेकिन क्या यह धार्मिक दृष्टि से सही है? इस विषय पर धर्मशास्त्रों और ज्योतिषाचार्यों के मत अलग-अलग हैं।
पंडितों के अनुसार, मोबाइल एक निजी और व्यावहारिक उपकरण है, जिसका उपयोग दिनभर अनेक कार्यों में होता है। कई बार इसका इस्तेमाल अशुद्ध या अनुचित स्थानों जैसे शौचालय या रसोई में भी किया जाता है। ऐसे में भगवान की तस्वीर का मोबाइल पर होना अशोभनीय और अपमानजनक माना जा सकता है। मोबाइल गिरना या गलत जगह पर रखना भी धार्मिक दृष्टि से भगवान की छवि का अपमान समझा जाता है।
वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि मोबाइल पर भगवान की तस्वीर लगाना भक्ति का आधुनिक माध्यम है। इससे व्यक्ति को हर समय सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति मिलती है। उनका कहना है कि मोबाइल अब जीवन का अभिन्न हिस्सा है, इसलिए भगवान की छवि को साथ रखना एक तरह से ‘डिजिटल मंदिर’ की अवधारणा को साकार करता है।
आध्यात्मिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति मोबाइल पर भगवान की फोटो लगाना चाहता है, तो उसे सम्मानपूर्वक व्यवहार करना चाहिए। मोबाइल को स्वच्छ रखें, पूजा-पाठ के समय उसे पवित्र स्थान पर रखें और अशुद्ध जगहों पर जाने से पहले उसे लॉक या ढक दें।
अंततः यह व्यक्ति की आस्था और दृष्टिकोण पर निर्भर करता है — कोई इसे श्रद्धा का प्रतीक मानता है तो कोई पवित्रता के नियमों के विपरीत। धर्माचार्यों का मत है कि भावना शुद्ध हो तो माध्यम कोई भी हो, ईश्वर का सान्निध्य हमेशा शुभ ही होता है।





