
gmedianews24.com/तिरुवनंतपुरम। दक्षिण भारत का केरल राज्य एक बार फिर देश के लिए रोल मॉडल बन गया है। राज्य सरकार और सामाजिक भागीदारी के माध्यम से केरल ने अपने यहां ‘अत्यंत गरीबी’ को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। यह दक्षिण एशिया का पहला ऐसा राज्य है, जिसने अपने सभी अत्यंत गरीब नागरिकों को गरीबी से बाहर निकालने का लक्ष्य हासिल किया।
माइक्रो प्लान से बदल रही जिंदगी
केरल के कोट्टायम जिले में 63 साल की स्वर्णम्मा का उदाहरण इस पहल की जीवंत तस्वीर पेश करता है। विधवा स्वर्णम्मा ने पूरी जिंदगी किराए के मकान में बिताई। एक दिन जिला प्रशासन की टीम उनके घर पहुंची और 10 लाख रुपए की मदद दी, ताकि वे अपना घर बना सकें और बचत कर सकें। स्वर्णम्मा ने 6 लाख रुपये में 3 सेंट (लगभग 1306 वर्ग फीट) जमीन खरीदी और अब उनके घर का निर्माण शुरू हो गया है।
स्वर्णम्मा जैसे केरल में 64 हजार परिवार और 1.03 लाख लोग ऐसे हैं, जिनकी जिंदगी अब पूरी तरह बदल गई है।
मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के मानक के मुताबिक जिनकी आय प्रतिदिन 158.10 रुपये से कम है, उन्हें अत्यंत गरीब माना जाता है। केरल ने इस मानक से आगे जाकर भोजन, आय, स्वास्थ्य और आवास को आधार बनाया और इसे ‘मानवीय गरिमा’ कार्यक्रम का नाम दिया।
73 हजार माइक्रो प्लान और सख्त निगरानी
राज्य सरकार ने 73 हजार माइक्रो प्लान बनाए, जिनमें प्रत्येक परिवार की जरूरत के अनुसार मदद सुनिश्चित की गई। इस योजना में सामाजिक संगठनों ने अभूतपूर्व सहयोग किया। हर मदद और हर पैसे का सख्त हिसाब रखा गया।




