
gmedianews24.com/नई दिल्ली। अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी की दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों की एंट्री रोकने पर उठे सवालों को लेकर भारत सरकार ने प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि इस प्रेस वार्ता में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। यह कार्यक्रम पूरी तरह से अफगानिस्तान के दूतावास द्वारा आयोजित किया गया था।
दरअसल, शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान महिला पत्रकारों को प्रवेश न देने पर विवाद खड़ा हो गया। इस घटना पर सोशल मीडिया पर कड़ा आक्रोश देखने को मिला।
विदेश मंत्रालय का बयान
विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और मुत्तकी के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद कोई संयुक्त प्रेस वार्ता नहीं की गई थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस अफगान दूतावास के परिसर में आयोजित हुई, जिसमें चुनिंदा पुरुष पत्रकार और अफगान दूतावास के अधिकारी ही शामिल हुए।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस घटना पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने इसे “भारत की महिला पत्रकारों का अपमान” करार दिया। वहीं, वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि जब महिला पत्रकारों को बाहर रखा गया, तो पुरुष पत्रकारों को भी प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़ देनी चाहिए थी।
तालिबान शासन पर उठे सवाल
गौरतलब है कि अगस्त 2021 में सत्ता पर काबिज हुए तालिबान शासन के दौरान अफगानिस्तान की महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन से वंचित कर दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे “दुनिया का सबसे गंभीर महिला अधिकार संकट” बताया है।
इस पूरे विवाद पर विदेश मंत्रालय ने फिर से दोहराया है कि अफगान दूतावास द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत सरकार की कोई संलिप्तता नहीं थी और महिला पत्रकारों को बाहर करने के फैसले से वह पूरी तरह अलग है।






