
gmedianews24.comनई दिल्ली, 10 अक्टूबर। सुप्रीम कोर्ट के अंदर 6 अक्टूबर को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश करने वाले एडवोकेट राकेश किशोर ने अपनी नाराजगी और वजह सामने रखी है। 72 वर्षीय राकेश का कहना है कि जस्टिस गवई ने हिंदू देवी-देवताओं और सनातन धर्म का अपमान किया, इसलिए वे चुप नहीं रह सकते थे।
राकेश किशोर ने बताया कि 90 के दशक में मुरादाबाद में रहने के दौरान उनके साथ कई कटु अनुभव हुए, जिसने उन्हें मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नाराज कर दिया। उन्होंने कहा, “अगर किसी की बकरी से मेरी स्कूटर छू भी जाती तो मुझे मारते और पत्नी को उठा ले जाते। ऐसे माहौल में जीना मुश्किल था।”
गौरतलब है कि 16 सितंबर को CJI गवई ने खजुराहो में भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति की बहाली की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी। इसी फैसले के विरोध में राकेश किशोर ने कोर्टरूम में जूता फेंका, हालांकि सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया और जूता CJI तक नहीं पहुंच सका। इस दौरान उन्होंने नारे लगाए- “सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।”
घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने 9 अक्टूबर को उनका लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया, जबकि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने भी उन्हें सस्पेंड कर दिया है।




