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शारदीय नवरात्र 2025 का शुभारंभ, पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा और गौरी चालीसा का पाठ

gmedianews24.com/नई दिल्ली। आज से शारदीय नवरात्र 2025 की शुरुआत हो गई है। इस दिन विशेष रूप से मां शैलपुत्री की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन घट स्थापना और पूजा-पाठ करने से सभी दुखों का अंत होता है और जीवन में शुभता आती है।

श्रद्धालुओं का मानना है कि गौरी चालीसा का पाठ इस दिन विशेष रूप से कल्याणकारी होता है। गौरी माता की भक्ति और स्तुति से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है, संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

पूजा विधि और महत्व
शारदीय नवरात्र में लोग अपने घरों में या मंदिरों में घट स्थापना करते हैं और मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना करते हैं। साथ ही, भक्त गौरी चालीसा का पाठ कर मां गौरी की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

गौरी चालीसा का महत्व
गौरी चालीसा में मां गौरी की महिमा, भक्ति और भक्तों पर उनकी दया का वर्णन किया गया है। इसे पढ़ने या सुनने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। चालीसा में मां से संकटों से मुक्ति, परिवार की खुशहाली और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की जाती है।

भक्तों की श्रद्धा
इस अवसर पर पूरे देश में मंदिरों और घरों में श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि नवरात्र के पहले दिन की पूजा विशेष रूप से फलदायी होती है।

इस शारदीय नवरात्र में श्रद्धालु मां शैलपुत्री, मां गौरी और देवी के अन्य रूपों की पूजा कर सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करेंगे।

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