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हर फालतू अपील की अनुमति नहीं देंगे”- पतंजलि की याचिका पर भड़के दिल्ली हाई कोर्ट के जज

gmedianews24.com/दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट में बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद को उस समय कड़ी फटकार का सामना करना पड़ा, जब उन्होंने डाबर च्यवनप्राश के खिलाफ अपमानजनक विज्ञापन पर लगी रोक के सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी। डिवीजन बेंच ने इस मामले में पतंजलि की अपील पर सख्त रुख अपनाया और कंपनी के वकीलों को चेतावनी दी कि वे हर “फालतू” अपील को स्वीकार नहीं करेंगे।

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यह मामला डाबर इंडिया लिमिटेड द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि पतंजलि अपने विज्ञापनों में डाबर के च्यवनप्राश को “साधारण” बताकर उसकी छवि खराब कर रही है। सिंगल बेंच ने डाबर के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पतंजलि को ऐसे विज्ञापनों पर तुरंत रोक लगाने का आदेश दिया था।

पतंजलि ने इस आदेश को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में चुनौती दी। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान, जज ने पतंजलि के वकीलों से तीखे सवाल किए। बेंच ने पूछा, “आप हर मामले में अपील कर रहे हैं क्योंकि आपके पास बहुत पैसा है।” जज ने आगे कहा कि “अगर यह अपील निरर्थक साबित हुई तो हम लागत (जुर्माना) लगाएंगे। हम ‘आलतू-फालतू’ अपीलों को स्वीकार नहीं करेंगे।”

अदालत ने कहा कि पतंजलि के विज्ञापन में जो भाषा इस्तेमाल की गई थी, वह साफ तौर पर दूसरे निर्माताओं को अज्ञानी साबित करने की कोशिश थी। विज्ञापन में कहा गया था कि “सिर्फ आयुर्वेद और वेदों का ज्ञान रखने वाले ही असली च्यवनप्राश बना सकते हैं।” बेंच ने टिप्पणी की कि इस तरह के दावे अपमानजनक हैं और यह संदेश देते हैं कि अन्य कंपनियां असली उत्पाद बनाने में सक्षम नहीं हैं।

फिलहाल, सिंगल बेंच द्वारा लगाई गई रोक जारी रहेगी, जब तक कि इस अपील का निपटारा नहीं हो जाता। अदालत की सख्त टिप्पणी से यह साफ है कि वह कंपनियों के बीच भ्रामक और अपमानजनक विज्ञापन की इस प्रवृत्ति को गंभीरता से ले रही है। यह मामला एक बार फिर कानूनी दायरे में विज्ञापन की नैतिकता और प्रतिस्पर्धी कंपनियों के बीच संतुलन की बहस को जन्म दे रहा है।

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