19 सितंबर को प्रदोष व्रत और पितृ तर्पण, गंगाजल से अभिषेक करने से मिलेगा पितृ दोष से मुक्ति

gmedianews24.com/नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, शुक्रवार 19 सितंबर को आश्विन माह की त्रयोदशी तिथि है। इस दिन प्रदोष व्रत का आयोजन होगा। प्रदोष व्रत पर भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और भक्त उपवास रखकर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
इसी दिन पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान भी किया जाएगा। गरुड़ पुराण में वर्णित है कि पितृ पक्ष में तर्पण करने से पितर प्रसन्न होकर साधक पर अपनी कृपा बरसाते हैं। उनकी कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और परिवार में शांति बनी रहती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव का गंगाजल से जलाभिषेक करना अत्यंत शुभ माना गया है। माना जाता है कि इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है।
पुराणों में यह भी कहा गया है कि भगवान शिव का जलाभिषेक करते समय मां गंगा के नामों का जप करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में मां गंगा के 108 नाम बताए गए हैं, जिनका उच्चारण करके साधक शिव पूजन और पितृ तर्पण कर सकते हैं।





