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चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं रखें खास सावधानी, शिशु पर नहीं पड़ेगा नकारात्मक असर

gmedianews24.com/नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में चंद्र ग्रहण का समय विशेष महत्व रखता है। इसे सूतक काल कहा जाता है और इसे गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान लापरवाही शिशु पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को चंद्र ग्रहण के समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है।

सूतक काल कब से कब तक?

इस वर्ष चंद्र ग्रहण 7 सितंबर की रात 9 बजकर 58 मिनट से शुरू होगा और 8 सितंबर को देर रात 1 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगा।

  • सूतक काल प्रारंभ : 7 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर

  • सूतक काल समाप्त : 8 सितंबर को रात 1 बजकर 26 मिनट पर

गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानियां

  • चंद्र ग्रहण के दौरान किसी भी नुकीली चीज जैसे सुई, कैंची या चाकू का उपयोग न करें।

  • ग्रहण को नग्न आंखों से न देखें।

  • सूतक काल के दौरान बाहर निकलने से बचें, विशेषकर नकारात्मक स्थानों जैसे श्मशान आदि पर न जाएं।

करें ये उपाय

  • भोजन और अन्य पवित्र वस्तुओं में तुलसी पत्ते डालकर रखें, ताकि उन पर ग्रहण का प्रभाव न पड़े।

  • चंद्र ग्रहण के समय “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः” मंत्र का जप करें।

  • भगवान राम और भगवान कृष्ण के मंत्रों का जाप भी शुभ माना गया है।

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