
gmedianews24.com/कोरबा। जिले में मादा भालू और उसके दो शावकों की करंट लगने से हुई मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन ने इस घटना में बिजली विभाग के कर्मचारी पर की गई कार्रवाई को अनुचित बताते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
“प्राकृतिक आपदा, लापरवाही नहीं” — यूनियन का दावा
यूनियन के अनुसार, यह घटना 26 मार्च 2026 को आए भीषण आंधी-तूफान के कारण हुई। तेज हवाओं से पेड़ बिजली लाइन पर गिर गया, जिससे तार टूटकर जमीन पर आ गिरे। उसी दौरान वहां से गुजर रहा भालू परिवार करंट की चपेट में आ गया।
यूनियन का कहना है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक आपदा थी, इसमें किसी कर्मचारी की व्यक्तिगत लापरवाही नहीं है। साथ ही, लाइन क्षतिग्रस्त होने की सूचना समय पर नहीं मिलने के कारण सुधार कार्य भी नहीं हो सका।
साक्ष्य मिटाने के आरोप
ज्ञापन में वन विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए यूनियन ने दावा किया है कि घटना के बाद मौके पर पहुंचे बिजलीकर्मी द्वारा बनाए गए फोटो और वीडियो को अधिकारियों ने मोबाइल से डिलीट करवा दिया।
यूनियन की चार प्रमुख मांगें
यूनियन ने प्रशासन के सामने चार सूत्रीय मांगें रखी हैं—
- पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- बिजली कर्मचारी पर दर्ज केस को तत्काल वापस लिया जाए।
- सूचना देने में देरी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
- साक्ष्य मिटाने के आरोप में दोषी अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद वन विभाग और बिजली विभाग के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।







