
gmedianews24.com/ नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ही कई तरह के मिथक भी तेजी से फैल रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बिना सही जानकारी के लोग बड़े फैसले ले लेते हैं, जो कई बार अनावश्यक खर्च और परेशानी का कारण बनते हैं।
वास्तु शास्त्र का मूल उद्देश्य अंधविश्वास फैलाना नहीं, बल्कि आसपास की ऊर्जा को सकारात्मक बनाए रखना है। इसलिए इससे जुड़े नियमों को सही तरीके से समझना बेहद जरूरी है।
मेनडोर को लेकर गलत धारणा
वास्तु को लेकर आम धारणा है कि घर का मुख्य द्वार (मेनडोर) उत्तर-पूर्व दिशा में होना ही शुभ होता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह पूरी तरह सही नहीं है। वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार के लगभग 30 प्रकार बताए गए हैं, जिनका प्रभाव अलग-अलग परिस्थितियों में भिन्न हो सकता है।
यदि किसी को अपने घर के मेनडोर की दिशा को लेकर संदेह हो, तो उसे बदलने या तोड़ने की जरूरत नहीं होती। आसपास की वस्तुओं के सही संतुलन और सजावट के जरिए ऊर्जा को सकारात्मक बनाया जा सकता है।
घर तोड़ने से नहीं होता वास्तु सुधार
वास्तु के नाम पर घर में तोड़फोड़ या बड़े स्तर पर रेनोवेशन करवाना भी एक बड़ी गलतफहमी है। कई लोग मानते हैं कि घर की संरचना बदलने से ही वास्तु दोष दूर होगा, जबकि ऐसा जरूरी नहीं है।
विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे-छोटे बदलाव जैसे फर्नीचर की सही प्लेसमेंट, साफ-सफाई और रोशनी का उचित प्रबंध करके भी घर की ऊर्जा को संतुलित किया जा सकता है।






