
gmedianews24.com/नई दिल्ली। चैत्र नवरात्र का पावन पर्व अपने सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है। आज शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर आदिशक्ति के सबसे शक्तिशाली और निर्भीक स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जा रही है। देशभर के मंदिरों और घरों में भक्त मां की आराधना कर सुख-समृद्धि और भय से मुक्ति की कामना कर रहे हैं।
मां कालरात्रि: शक्ति और साहस का प्रतीक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब असुर रक्तबीज का अत्याचार बढ़ गया था, तब उसके संहार के लिए मां कालरात्रि का अवतार हुआ। मां का स्वरूप अत्यंत उग्र और तेजस्वी माना जाता है। उनका वर्ण काला है, बिखरे केश, चार भुजाएं और गले में बिजली की माला उनकी अद्भुत शक्ति का प्रतीक हैं।
मां कालरात्रि को दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों को भयमुक्त करने वाली देवी माना जाता है।
पूजा और मंत्रों का विशेष महत्व
नवरात्र की सप्तमी पर मां कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व होता है। भक्त इस दिन व्रत रखकर मां की स्तुति, मंत्र जाप और आरती करते हैं।
प्रमुख मंत्र:
“ॐ देवी कालरात्र्यै नमः”
“क्लीं ऐं श्री कालिकायै नमः”
इन मंत्रों के जाप से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और जीवन में साहस एवं ऊर्जा का संचार होता है।
भक्तों में दिखा उत्साह
देश के विभिन्न हिस्सों में मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। माता के दरबार में विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। कई स्थानों पर भंडारे और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
संकट हरने वाली देवी
मान्यता है कि मां कालरात्रि अपने भक्तों के सभी कष्टों और भय को दूर करती हैं। उनकी कृपा से जीवन में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं और सुख-शांति का वास होता है।







