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नक्सल हमले में घायल आरक्षक को फिर नक्सल क्षेत्र भेजना गलत: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

gmedianews24.com/बिलासपुर। नक्सल हमले में गंभीर रूप से घायल आरक्षक की नक्सल प्रभावित क्षेत्र में दोबारा पदस्थापना को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि ऐसे जवानों की शारीरिक स्थिति को नजरअंदाज कर उन्हें संवेदनशील और नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात नहीं किया जा सकता।

मामला सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम नागरदा निवासी दिनेश ओगरे से जुड़ा है, जो छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की दूसरी बटालियन सकरी (बिलासपुर) में आरक्षक के पद पर कार्यरत हैं। वर्ष 2016 में बीजापुर जिले के पामेड़ क्षेत्र में पदस्थापना के दौरान हुए नक्सली हमले में उनके सिर में गोली लगी थी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद वर्ष 2018 में ड्यूटी के दौरान उनके बाएं पैर में फ्रैक्चर भी हुआ।

इसके बावजूद पुलिस मुख्यालय रायपुर द्वारा उनकी पुनः नक्सल प्रभावित क्षेत्र अदवाड़ा कैंप, जिला बीजापुर में पदस्थापना कर दी गई। इस पर दिनेश ओगरे ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।

याचिका में बताया गया कि पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा 3 सितम्बर 2016 और 18 मार्च 2021 को जारी सर्कुलर में स्पष्ट निर्देश हैं कि नक्सली हमले में घायल जवानों से उनकी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही ड्यूटी ली जाए और उन्हें नक्सल प्रभावित जिलों में तैनात न किया जाए।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता की शारीरिक स्थिति की अनदेखी करते हुए उन्हें फिर से नक्सल क्षेत्र में भेजना DGP के निर्देशों का उल्लंघन है। कोर्ट ने इसे न केवल अनुचित बताया, बल्कि जवान की सुरक्षा और स्वास्थ्य के साथ समझौता भी माना।

मामले में फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली है। साथ ही अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) प्रशासन और ADGP, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ता द्वारा मैदानी जिले में पदस्थापना के लिए दिए गए आवेदन पर तत्काल निर्णय लें।

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