
gmedianews24.com/नई दिल्ली। सोमवार के दिन पड़ने वाला सोम प्रदोष व्रत आज श्रद्धा और आस्था के साथ रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में प्रदोष तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। जब प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है तो इसे सोम प्रदोष कहा जाता है, जिसका विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने के साथ प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा सुनना या पढ़ना भी आवश्यक माना जाता है। कहा जाता है कि कथा के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
सोम प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक नगर में एक अत्यंत गरीब ब्राह्मणी अपने बच्चों के साथ भीख मांगकर जीवन यापन करती थी। एक दिन उसे नदी किनारे एक घायल बालक मिला, जो विदर्भ देश का राजकुमार था। शत्रुओं ने उसके माता-पिता की हत्या कर उसका राज्य छीन लिया था। ब्राह्मणी उस बालक को अपने घर ले आई और उसे अपने पुत्र की तरह पालने लगी।
कुछ समय बाद दोनों बालक जंगल में खेलते हुए शांडिल्य ऋषि से मिले। ऋषि ने उन्हें सोम प्रदोष व्रत रखने और उसकी कथा सुनने की विधि बताई। ब्राह्मणी और दोनों बालकों ने श्रद्धा के साथ इस व्रत का पालन करना शुरू कर दिया।
समय बीतने पर राजकुमार की मुलाकात गंधर्व कन्या अंशुमती से हुई और दोनों एक-दूसरे से प्रेम करने लगे। जब गंधर्वराज को पता चला कि वह विदर्भ का असली राजकुमार है, तो उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह उससे कर दिया। बाद में गंधर्व सेना की मदद से राजकुमार ने अपना खोया हुआ राज्य भी वापस पा लिया।
राजकुमार ने उस ब्राह्मणी और उसके पुत्र को राजमहल में सम्मानपूर्वक स्थान दिया। माना जाता है कि सोम प्रदोष व्रत और कथा के प्रभाव से ही राजकुमार को अपना राज्य और ब्राह्मणी को सुख-समृद्धि प्राप्त हुई।







