
gmedianews24.com/नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पापमोचनी एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। यह एकादशी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आती है और इसे पापों का नाश करने वाली तिथि माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन के पापों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व बताया गया है।
मान्यता है कि पापमोचनी एकादशी के दिन तुलसी जी की विधि-विधान से पूजा करने पर भगवान विष्णु के साथ-साथ मां लक्ष्मी की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है।
पापमोचनी एकादशी पर तुलसी पूजा की विधि
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन तुलसी की पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पूजा की विधि इस प्रकार है—
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सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे, विशेषकर पीले रंग के वस्त्र पहनें।
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भगवान विष्णु की पूजा करें और भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें।
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पूजा के बाद तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं।
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तुलसी जी को सिंदूर, लाल चुनरी और शृंगार की सामग्री अर्पित करें।
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शाम के समय तुलसी के पास घी का दीपक जलाकर 5, 7 या 11 बार परिक्रमा करें।
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परिक्रमा करते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
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अंत में तुलसी चालीसा और आरती का पाठ करें।
पापमोचनी एकादशी के शक्तिशाली तुलसी मंत्र
पूजा के दौरान इन मंत्रों का जप करने से विशेष फल प्राप्त होता है—
तुलसी गायत्री मंत्र:
ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।।
तुलसी स्तुति:
महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी,
आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।
तुलसी नामाष्टक मंत्र:
वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
पापमोचनी एकादशी पर इन नियमों का रखें ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन कुछ नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है—
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एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।
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इस दिन तुलसी में जल अर्पित करने से बचना चाहिए।
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भगवान विष्णु को भोग लगाने के लिए तुलसी पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
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तुलसी पूजन के समय काले रंग के कपड़े पहनने से बचें।
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स्नान के बाद ही तुलसी पूजा करना शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि पापमोचनी एकादशी के दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।







