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21 हजार रुपये से शुरू हुआ सफर, आज 100 देशों में कारोबार: जमशेदजी टाटा जयंती पर खास

gmedianews24.com/नई दिल्ली। आज Tata Group की गिनती न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के सबसे बड़े बिजनेस समूहों में होती है। समूह का कारोबार 100 से अधिक देशों में फैला है। वित्त वर्ष 2024-25 में समूह का रेवेन्यू 16,50,471 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जबकि 31 मार्च 2025 तक मार्केट कैपिटल 30,07,525 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

लेकिन इस विशाल साम्राज्य की शुरुआत महज 21 हजार रुपये से हुई थी। आज समूह के संस्थापक Jamsetji Tata की जयंती है। 3 मार्च 1839 को गुजरात के नवसारी में जन्मे जमशेदजी ने 158 साल पहले उस नींव को रखा, जिसने आगे चलकर टाटा समूह का रूप लिया।

परंपरा तोड़कर बिजनेस में उतरे पिता

जमशेदजी के पिता Nusserwanji Tata पारसी परिवार से थे। परिवार की कई पीढ़ियां धार्मिक परंपराओं में रहीं, लेकिन नुसरवानजी ने परंपरा तोड़ते हुए व्यापार का रास्ता चुना। यही सोच आगे चलकर जमशेदजी के जीवन की दिशा बनी।

20 साल की उम्र में बिजनेस में कदम

14 वर्ष की उम्र में जमशेदजी बॉम्बे (अब मुंबई) पहुंचे और एलफिंस्टन कॉलेज से 1858 में ‘ग्रीन स्कॉलर’ के रूप में शिक्षा पूरी की। 20 वर्ष की उम्र में वे अपने पिता के छोटे ट्रेडिंग और बैंकिंग व्यवसाय से जुड़ गए। उस दौर में भारतीयों के लिए व्यापार करना आसान नहीं था, क्योंकि देश ब्रिटिश शासन के अधीन था और 1857 का विद्रोह अभी शांत हुआ था।

ऐसे हुई टाटा ग्रुप की शुरुआत

सन 1868 में महज 29 वर्ष की आयु में जमशेदजी ने 21,000 रुपये की पूंजी से एक ट्रेडिंग कंपनी शुरू की। यही कंपनी आगे चलकर टाटा ग्रुप की नींव बनी। इसके बाद उन्होंने इंग्लैंड का दौरा किया और वैश्विक व्यापार की समझ विकसित की।

नागपुर में एम्प्रेस मिल्स की स्थापना

1874 में उन्होंने बॉम्बे के बजाय नागपुर में टेक्सटाइल मिल स्थापित की, जिसे Empress Mills के नाम से जाना गया। यह फैसला उस समय एक दूरदर्शी कदम साबित हुआ। एम्प्रेस मिल्स ने न केवल औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया, बल्कि कर्मचारियों की भलाई के लिए भी नई पहल की।

1892 में जमशेदजी ने भारतीय छात्रों की उच्च शिक्षा के लिए JN Tata Endowment की स्थापना की, जो आज भी छात्रों को विदेश में पढ़ाई के लिए सहायता प्रदान करता है।

ताज महल होटल से आतिथ्य क्षेत्र में कदम

1903 में मुंबई में Taj Mahal Palace Hotel की शुरुआत की गई, जिसने भारतीय आतिथ्य उद्योग को नई पहचान दी। 1904 में जर्मनी में जमशेदजी का निधन हो गया। इसके बाद समूह की कमान उनके बड़े पुत्र Dorabji Tata ने संभाली।

आज टाटा ग्रुप स्टील, ऑटोमोबाइल, आईटी, होटल, पावर, एविएशन और रिटेल समेत अनेक क्षेत्रों में अग्रणी है। जमशेदजी टाटा की दूरदर्शिता, साहस और सामाजिक सोच ने भारत के औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखी, जिसे आज भी देश गर्व के साथ याद करता है।

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