
gmedianews24.com/नई दिल्ली — रवि प्रदोष व्रत को भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पूजा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती, जब तक प्रदोष व्रत की कथा का पाठ या श्रवण न किया जाए। माना जाता है कि व्रत कथा के बिना व्रत का पूरा फल प्राप्त नहीं होता।
क्या है रवि प्रदोष व्रत कथा
धार्मिक कथा के अनुसार एक गरीब ब्राह्मण परिवार भिक्षा मांगकर जीवन यापन करता था। एक दिन ब्राह्मणी को एक भटकता हुआ राजकुमार मिला, जिसे उसने अपने साथ रख लिया। बाद में वे एक ऋषि के आश्रम पहुंचे, जहां उन्हें प्रदोष व्रत करने की सलाह दी गई।
पूरी श्रद्धा से व्रत और पूजा करने के बाद राजकुमार का जीवन बदल गया। उसका विवाह हुआ और उसने अपना खोया हुआ राज्य भी वापस पा लिया। ब्राह्मणी के पुत्र को उसने अपना प्रधानमंत्री बनाया। मान्यता है कि यह सब प्रदोष व्रत की कृपा से संभव हुआ।
कथा सुनने से क्या मिलता है फल
धार्मिक विश्वास है कि प्रदोष व्रत की कथा सुनने या पढ़ने से दरिद्रता दूर होती है, सम्मान और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है तथा जीवन की बाधाएं कम होती हैं।
व्रत के दिन क्या करें
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पूजा के बाद आरती करें और अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें।
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शाम को घर के मुख्य द्वार और शिव मंदिर में दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
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रविवार होने के कारण पूजा के बाद जरूरतमंद को तांबे का बर्तन, गुड़ या गेहूं दान करना फलदायी माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से व्रत और कथा का पालन करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।







