
gmedianews24.com/नई दिल्ली। हिंदू धर्म में होलिका दहन का पर्व केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक ही नहीं, बल्कि अटूट भक्ति और विश्वास का भी प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह अग्नि भक्त प्रहलाद की रक्षा और अत्याचारी हिरण्यकश्यप के अंत की साक्षी है।
इस दिन भगवान नृसिंह की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा और स्तोत्र पाठ करने से जीवन के बड़े संकट दूर होते हैं और शत्रुओं से रक्षा होती है।
होलिका दहन पर भगवान नृसिंह की पूजा का महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन भगवान नृसिंह की आराधना करने से भय, रोग, संकट और ऋण से मुक्ति मिलती है। इसे नकारात्मक शक्तियों के नाश और जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाला दिन माना जाता है।
होलिका दहन पूजा विधि
होलिका दहन के दिन सुबह उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान पर भगवान नृसिंह का ध्यान करें।
फिर उन्हें पीले फूल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। पूजा के बाद श्री नृसिंह स्तोत्र और श्री नरसिंह ऋण मोचन स्तोत्र का पाठ करें।
मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास से किया गया स्तोत्र पाठ जीवन की बाधाओं को दूर करता है।







