gmedianews24.com//बिलासपुर। बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सेक्स स्कैंडल के नाम पर अवैध वसूली से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने गिरोह के कथित मददगार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि ऐसे गंभीर अपराधों में हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
सेक्स स्कैंडल में फंसाने की धमकी देकर वसूली
मामला बलौदाबाजार के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है। यहां एक गिरोह ने पीड़ित अमरीश साहू को सेक्स स्कैंडल में झूठा फंसाने की धमकी देकर 6 लाख रुपये की मांग की थी। डर के कारण पीड़ित ने किस्तों में कुल 2.75 लाख रुपये आरोपियों को दे दिए।
जांच में सामने आया कि आरोपी संकेत शुक्ला ने उगाही की रकम आरोपियों तक पहुंचाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
गवाह से आरोपी बना, सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल
शुरुआत में पुलिस ने संकेत शुक्ला को मामले में गवाह बनाया था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर उसकी सक्रिय भूमिका सामने आई। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश की।
संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
फरार रहने और आपराधिक रिकॉर्ड का भी उल्लेख
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि आरोपी जांच के दौरान फरार था। उसके खिलाफ पहले से तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं और उगाही की रकम के लेनदेन में उसकी सक्रिय भूमिका सामने आई है।
कोर्ट ने कहा कि धमकी और जबरन वसूली जैसे सुनियोजित अपराध समाज के लिए खतरनाक हैं, इसलिए आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती।







