
gmedianews24.com/नई दिल्ली। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा से पहले ओटावा के कूटनीतिक रुख में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कनाडाई अधिकारी अब भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को प्राथमिकता देते हुए आर्थिक साझेदारी को फिर से मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों से दोनों देशों के बीच भारतीय हस्तक्षेप और अंतरराष्ट्रीय दमन के आरोपों को लेकर रिश्तों में तनाव बना हुआ था। हालांकि अब कनाडाई अधिकारी इन मतभेदों को पीछे छोड़कर व्यापारिक सहयोग और आर्थिक साझेदारी को पटरी पर लाने के लिए बातचीत को प्राथमिकता दे रहे हैं।
व्यापार और आर्थिक साझेदारी पर फोकस
कनाडाई अधिकारियों का कहना है कि भारत सरकार के साथ इन मुद्दों पर परिपक्व और ठोस चर्चा जारी है। विदेशी हस्तक्षेप से बचाव के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र भी मौजूद हैं।
सूत्रों के अनुसार, कार्नी की भारत यात्रा का मुख्य उद्देश्य लंबे समय से चली आ रही राजनयिक चुनौतियों के बाद संबंधों को सामान्य करना और व्यापारिक सहयोग को बढ़ावा देना है। अधिकारियों ने संकेत दिया कि अगर कनाडा को भारत द्वारा उसकी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय हस्तक्षेप का संदेह होता, तो प्रधानमंत्री की यात्रा संभव नहीं होती।
सार्थक बातचीत का आधार तैयार
रिपोर्ट के मुताबिक, एनडीटीवी से बातचीत में अधिकारियों ने बताया कि ओटावा ने अपना रुख कब बदला, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन भारत में नरेंद्र मोदी सरकार के साथ वरिष्ठ अधिकारियों, मंत्रिस्तरीय और नेतृत्व स्तर पर लगातार संवाद जारी है। इससे आगे की सार्थक चर्चा के लिए मजबूत आधार तैयार हुआ है।
विदेशी हस्तक्षेप पर कनाडा सख्त
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि कनाडा अपने आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करता। यदि ऐसा कोई संकेत मिलता, तो प्रधानमंत्री की भारत यात्रा पर विचार नहीं किया जाता।







