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लंबी जंग की तैयारी में भारत: सस्ते और स्वदेशी हथियारों पर बढ़ा फोकस, ‘बेबी ब्रह्मोस’ मॉडल की रणनीति

gmedianews24.com/नई दिल्ली। दुनिया भर में जारी युद्धों ने सैन्य रणनीतियों की दिशा बदल दी है। रूसयूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने साफ कर दिया है कि भविष्य की जंग अब लंबी और संसाधन-खपत वाली होगी। इसी बदलती हकीकत को देखते हुए भारत भी अपनी सैन्य तैयारी को नए सिरे से मजबूत करने में जुट गया है।

अब सेना का फोकस केवल महंगी और सीमित संख्या वाली मिसाइलों पर नहीं, बल्कि उनके छोटे और किफायती मॉडल्स के बड़े भंडार तैयार करने पर है।

‘बेबी ब्रह्मोस’ रणनीति: किफायती और घातक हथियार

हाल ही में पिनाका रॉकेट सिस्टम के ‘हवाई संस्करण’ के परीक्षण को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसकी सटीकता और मारक क्षमता के कारण इसे ‘बेबी ब्रह्मोस’ जैसा प्रभावी माना जा रहा है।

सेना प्रमुख उपेन्द्र द्विवेदी ने इस बदलाव को जरूरी बताते हुए कहा कि किफायती लेकिन अत्याधुनिक हथियारों का बड़ा भंडार ही लंबी और हाई-डेंसिटी जंग में निर्णायक साबित होगा।

रक्षा समिति की रिपोर्ट: कम लागत में देश में बने हथियार

संसद की रक्षा संबंधी स्थायी समिति ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में इस रणनीति का समर्थन किया है। समिति ने कहा कि लंबे और भीषण युद्ध की स्थिति में देश को ऐसे हथियार चाहिए जो बड़े पैमाने पर और कम लागत में देश के भीतर ही तैयार हो सकें।

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