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25 फरवरी से शुरू होगा होलाष्टक, 3 मार्च को होलिका दहन के साथ होगा समापन — जानें क्यों माने जाते हैं ये आठ दिन अशुभ

gmedianews24.com/नई दिल्ली। भारत सहित देशभर में होली के पर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं, लेकिन उससे पहले होलाष्टक का समय विशेष महत्व रखता है। इस वर्ष होलाष्टक 25 फरवरी 2026 से प्रारंभ होकर 3 मार्च 2026 को होलिका दहन के साथ समाप्त होगा।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन आठ दिनों में किसी भी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है। होलाष्टक फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होकर होलिका दहन तक चलता है।

क्या है होलाष्टक का धार्मिक महत्व

‘होलाष्टक’ शब्द होली और अष्टक (आठ) से मिलकर बना है, यानी होली से पहले के आठ दिन। पौराणिक मान्यता के अनुसार यही वह समय था जब भक्त प्रह्लाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप ने भगवान विष्णु की भक्ति से दूर करने के लिए अनेक यातनाएं दी थीं।

मान्यता है कि आठवें दिन प्रह्लाद को उनकी बुआ होलिका की गोद में अग्नि में बैठाया गया था। इसी कारण इन आठ दिनों को कष्ट और परीक्षा का काल माना जाता है और नई शुरुआत के लिए अशुभ समझा जाता है।

ज्योतिषीय कारण भी माने जाते हैं

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार होलाष्टक के दौरान प्रमुख ग्रह उग्र अवस्था में रहते हैं, जिससे निर्णय क्षमता और मानसिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। मान्यता है कि इस समय शुरू किए गए कार्यों में बाधाएं आने की आशंका रहती है।

इसी वजह से विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, सगाई, नया व्यापार या बड़ा निवेश जैसे मांगलिक कार्य इन दिनों टाल दिए जाते हैं।

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