[metaslider id="31163"]
Featuredदेश

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: साइबर ठगी के शिकार लोगों को मुआवजा और सुरक्षा दे सरकार, जागरूकता बढ़ाने पर जोर

gmedianews24.com/नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को साइबर अपराधों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार को ऑनलाइन ठगी में अपनी मेहनत की कमाई गंवाने वाले कमजोर लोगों को जागरूक करना चाहिए, उन्हें मुआवजा देना चाहिए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने परमजीत नामक व्यक्ति को जमानत देते हुए ये टिप्पणियां कीं। आरोपी पर ऑनलाइन घोटाले के पीड़ितों से जबरन वसूली किए गए पैसे जमा करने के लिए फर्जी बैंक खाते खोलने और उन्हें कथित साइबर अपराधियों को बेचने का आरोप है।

कमजोर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करे सरकार

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नागरत्ना ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस डी संजय से कहा कि सरकार और पुलिस को साइबर ठगी के शिकार कमजोर लोगों, खासकर बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए और जरूरत पड़ने पर उन्हें मुआवजा भी देना चाहिए।

पीठ ने कहा कि जनता को जागरूक करना बेहद जरूरी है। टीवी और रेडियो जैसे माध्यमों पर ऐसे कार्यक्रम प्रसारित किए जाएं, जिनमें बताया जाए कि साइबर अपराधी किस तरह लोगों को निशाना बनाते हैं, ताकि लोग उनके तौर-तरीकों को समझ सकें और ठगी से बच सकें।

‘मैं भी साइबर ठगी का शिकार होते-होते बचा’

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि साइबर अपराधी बेहद चालाक होते हैं और वह खुद भी एक बार इनके जाल में फंसने से बाल-बाल बचे थे। उन्होंने बताया कि सरकार ने संचार साथी प्लेटफॉर्म शुरू किया है, जहां लोग साइबर अपराध, चोरी हुए मोबाइल फोन या पहचान से जुड़ी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव

न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि लोगों को स्पष्ट रूप से दिखाया जाना चाहिए कि साइबर जालसाज कैसे काम करते हैं और धोखाधड़ी कैसे की जाती है। उन्हें बताया जाए कि इस तरह की कॉल, मैसेज या लिंक सामने आने पर कैसे सतर्क रहें और उन्हें नजरअंदाज करें।

Related Articles

Back to top button