
gmedianews24.com/नई दिल्ली। फरवरी महीने से शादियों के शुभ मुहूर्त शुरू होने जा रहे हैं। जिन हिंदू परिवारों में शादी की शहनाई बजने वाली है, वहां विवाह निमंत्रण पत्र भी छपने लगे हैं। हिंदू धर्म में विवाह को मनुष्य के जीवन का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है, इसलिए शादी का निमंत्रण पत्र भी विशेष महत्व रखता है। यह केवल एक कार्ड नहीं, बल्कि नए जीवन की शुरुआत का औपचारिक संदेश होता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, शादी के निमंत्रण पत्र को भी शुभ ऊर्जा और सकारात्मकता के साथ तैयार करना चाहिए। मान्यता है कि वास्तु नियमों का पालन करते हुए बनाए गए कार्ड घर में सुख, शांति और समृद्धि लाते हैं।
शादी के निमंत्रण कार्ड का रंग
वास्तु शास्त्र के अनुसार शादी के निमंत्रण पत्रों के लिए लाल, पीला, केसरिया या क्रीम रंग सबसे शुभ माने जाते हैं। लाल रंग प्रेम और वैवाहिक बंधन का प्रतीक है, जबकि पीला और केसरिया रंग शुभ शुरुआत और समृद्धि का संकेत देते हैं। वहीं काले या गहरे भूरे रंग का प्रयोग करने से बचना चाहिए, क्योंकि इन्हें नकारात्मकता और उदासी से जोड़ा जाता है।
डिजाइन में हों शुभ प्रतीक
वास्तु शास्त्र के अनुसार विवाह कार्ड पर देवी-देवताओं या शुभ प्रतीकों का चित्र होना अच्छा माना जाता है। विशेष रूप से भगवान गणेश का चित्र शामिल करना शुभ माना जाता है, क्योंकि उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है। इसके अलावा स्वास्तिक और कलश जैसे मंगल प्रतीक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और वैवाहिक जीवन को सुखद बनाने में सहायक माने जाते हैं। बहुत अधिक जटिल या भ्रमित करने वाले डिजाइन से बचने की सलाह दी जाती है।
शब्दों का चयन भी महत्वपूर्ण
शादी के निमंत्रण पत्र में लिखे शब्द विनम्र, शुद्ध और सकारात्मक होने चाहिए। कठोर या नकारात्मक शब्दों से बचना चाहिए। शुभ मुहूर्त, तिथि और समय स्पष्ट और सही रूप में छपे हों। परंपरा के अनुसार पहला विवाह कार्ड कुलदेवता या भगवान गणेश को समर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
दूल्हा-दुल्हन की फोटो छपवाने से बचें
आजकल कई लोग शादी के कार्ड पर दूल्हा-दुल्हन की तस्वीर छपवाते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा करना उचित नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे अनावश्यक ध्यान आकर्षित होता है और नजर दोष की आशंका बढ़ सकती है।






