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JNU में चेतावनी रैली, विवादित नारों से गूंजा कैंपस; छात्र निलंबन के विरोध में प्रदर्शन

gmedianews24.com/नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में रविवार रात छात्र संगठन जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (JNUSU) के कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कैंपस के भीतर चेतावनी रैली निकालकर प्रदर्शन किया। इस दौरान लगाए गए कुछ नारों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद, ठाकुरवाद मुर्दाबाद और हिन्दू राष्ट्र मुर्दाबाद जैसे नारे लगाए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और केंद्र सरकार के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विरोध में भी नारे लगाए गए।

UGC गाइडलाइंस और रस्टिकेशन बना मुख्य मुद्दा

छात्रों का प्रदर्शन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की गाइडलाइंस लागू करने और छात्रों के रस्टिकेशन (निलंबन) आदेश को रद्द करने की मांग को लेकर था। प्रदर्शनकारी यूनिवर्सिटी प्रशासन की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे।

छात्र संगठनों का आरोप है कि हाल ही में विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए JNUSU के चार पदाधिकारियों—प्रेसिडेंट अदिति मिश्रा और वाइस प्रेसिडेंट गोपिका के बाबू सहित अन्य को विरोध प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में दो सेमेस्टर के लिए रस्टिकेट कर दिया।

अन्य छात्र नेताओं पर भी कार्रवाई

जनरल सेक्रेटरी सुनील यादव, जॉइंट सेक्रेटरी दानिश अली और पूर्व प्रेसिडेंट नीतीश कुमार पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। इन पर डॉ. बीआर अंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में लगी फेशियल रिकग्निशन तकनीक को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। संबंधित छात्रों को तत्काल प्रभाव से पूरे कैंपस से बाहर कर दिया गया।

प्रशासन के अनुसार, 21 नवंबर 2025 को लाइब्रेरी में लगाए गए फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी आधारित एक्सेस गेट को नष्ट करने का दोषी पाए जाने पर नीतीश कुमार पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। बताया गया है कि इस तकनीक को लगभग 20 लाख रुपये की लागत से स्थापित किया गया था।

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