महाशिवरात्रि के बाद सूर्य ग्रहण का प्रभाव, 48 घंटे विशेष सावधानी बरतने की सलाह

gmedianews24.com/हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 की महाशिवरात्रि बेहद विशेष मानी जा रही है। 15 फरवरी को महादेव का पावन पर्व मनाने के ठीक दो दिन बाद, 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार किसी बड़े धार्मिक पर्व और ग्रहण के बीच कम समय होने पर ब्रह्मांडीय ऊर्जा में तीव्र परिवर्तन होता है, जिसका प्रभाव साधना और मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि महाशिवरात्रि की पूजा और उसके बाद के 48 घंटे आध्यात्मिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं। इस दौरान श्रद्धालुओं को विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है, ताकि पूजा का पूर्ण फल मिल सके और ग्रहण के संभावित नकारात्मक प्रभाव से बचाव हो सके।
ग्रहण से पहले बढ़ता है आध्यात्मिक प्रभाव
मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात ‘निशिता काल’ में की गई आराधना के बाद से ही ग्रहण की ऊर्जा का प्रभाव महसूस होना शुरू हो सकता है। इसलिए इस समय मानसिक शुद्धता, संयम और संकल्प शक्ति का विशेष महत्व बढ़ जाता है।
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार यह समय नकारात्मक ऊर्जा से दूर रहने और मंत्र जाप के माध्यम से आत्मिक सुरक्षा का होता है।
पूजा और व्रत में बरतें सावधानी
विशेषज्ञों के अनुसार महाशिवरात्रि से लेकर ग्रहण की समाप्ति तक कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए—
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व्रत का पारण विधि-विधान से करें और तामसिक भोजन से दूर रहें।
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मन में क्रोध, ईर्ष्या या नकारात्मक विचार न आने दें।
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‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का मानसिक जाप करते रहें।
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दान-पुण्य निस्वार्थ भाव से करें, इसे अत्यंत फलदायी माना जाता है।
शिव साधना को माना गया सुरक्षा कवच
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में की गई उपासना विशेष फलदायी होती है। जागरण, शिव चालीसा पाठ और रुद्राभिषेक को ग्रह दोषों से राहत देने वाला बताया गया है। श्रद्धालु मानते हैं कि इस समय की गई भक्ति से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और आध्यात्मिक शक्ति मजबूत होती है।







