
gmedianews24.com/नोएडा। नोएडा में 16 जनवरी की रात सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की पानी में डूबने से हुई मौत अब एक सामान्य हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक और सिस्टम फेल्योर के रूप में सामने आ रही है। शासन द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच में यह तथ्य उजागर हुआ है कि रेस्क्यू ऑपरेशन में गंभीर लापरवाही बरती गई।
SIT ने मामले में नोएडा प्राधिकरण, पुलिस और फायर विभाग सहित तीन विभागों से 22 से अधिक सवाल पूछे। इसके जवाब में नोएडा प्राधिकरण ने 150 पन्नों, जबकि पुलिस विभाग ने 450 पन्नों की रिपोर्ट SIT को सौंपी है। जांच टीम का सबसे अहम सवाल था कि रेस्क्यू में करीब दो घंटे की देरी क्यों हुई, लेकिन इस पर संबंधित अधिकारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।
रेस्क्यू में देरी बनी मौत की वजह
सूत्रों के अनुसार, युवराज की कार जब पानी में डूबी, उस समय मौके पर पहले पुलिस और फिर फायर ब्रिगेड की टीम पहुंची थी। फायर विभाग के कर्मचारियों ने स्वीकार किया कि उन्हें तैरना नहीं आता और उनके पास आवश्यक रेस्क्यू उपकरण भी नहीं थे। इसके बावजूद न तो चीफ फायर ऑफिसर मौके पर पहुंचे और न ही उन्होंने किसी प्रकार का मार्गदर्शन किया।
नोएडा प्राधिकरण के CEO पर पहला बड़ा एक्शन
SIT रिपोर्ट में नोएडा शहर के रखरखाव में लापरवाही को भी उजागर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, जिस प्लॉट के पास हादसा हुआ, वहां पहले से ही सड़क कट और जलभराव की समस्या थी, लेकिन अधीनस्थ अधिकारियों से जवाब-तलब नहीं किया गया। फाइल अप्रूव होने के बाद भी काम आगे नहीं बढ़ाया गया, जबकि इसकी निगरानी और फॉलोअप की जिम्मेदारी प्राधिकरण के CEO लोकेश एम. की थी।







