
gmedianews24.com/पुणे। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने शनिवार को स्पष्ट कहा कि जजों का तबादला पूरी तरह न्यायपालिका का आंतरिक विषय है, इसमें केंद्र सरकार या कार्यपालिका की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ फैसले देने वाले जजों का ट्रांसफर किया जाना न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हस्तक्षेप है।
जस्टिस भुइयां पुणे स्थित ILS लॉ कॉलेज में आयोजित प्रिंसिपल जी.वी. पंडित मेमोरियल लेक्चर में संबोधित कर रहे थे।
कॉलेजियम सिस्टम पर उठाए गंभीर सवाल
अपने संबोधन में जस्टिस भुइयां ने कहा कि यदि कॉलेजियम के प्रस्ताव में ही यह दर्ज हो कि किसी जज का ट्रांसफर केंद्र सरकार के पुनर्विचार अनुरोध के कारण बदला गया, तो इससे कॉलेजियम प्रणाली की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते हैं।
उन्होंने कहा,
“हाई कोर्ट के जजों की पोस्टिंग या ट्रांसफर में कार्यपालिका का कोई दखल नहीं हो सकता। यह पूरी तरह न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसका उद्देश्य केवल न्याय के बेहतर प्रशासन से जुड़ा होना चाहिए।”
कार्यपालिका के प्रभाव को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
जस्टिस भुइयां ने कहा कि कॉलेजियम के फैसलों में कार्यपालिका के प्रभाव की खुली स्वीकृति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे न्यायपालिका की स्वायत्तता और स्वतंत्र निर्णय क्षमता प्रभावित होती है।
संविधान सर्वोच्च, संसद नहीं
उन्होंने संविधान के मूल सिद्धांतों की याद दिलाते हुए कहा कि भारत के संविधान निर्माताओं ने संसद की संप्रभुता के बजाय संविधान की सर्वोच्चता को चुना था।







