
gmedianews24.com/दुर्ग। जिले के उतई क्षेत्र में एक निजी अस्पताल की गंभीर लापरवाही सामने आई है, जहां सड़क दुर्घटना में घायल नौ वर्षीय बच्चे के फ्रैक्चर का गलत तरीके से इलाज किया गया। इलाज के नाम पर बिना विशेषज्ञ चिकित्सक की प्रत्यक्ष जांच के बच्चे के हाथ में प्लास्टर कर दिया गया, जिससे कई दिनों बाद भी फ्रैक्चर में कोई सुधार नहीं हुआ और बच्चा लगातार दर्द से परेशान है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार उतई थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पतोरा निवासी नौ वर्षीय सलोक बंजारे, पिता राजेश कुमार बंजारे, 26 दिसंबर को हुई दुर्घटना में दाहिने हाथ में फ्रैक्चर से घायल हो गया था। परिजन उसे उपचार के लिए आस्था अस्पताल, उतई लेकर पहुंचे। आरोप है कि अस्पताल में पदस्थ बीएएमएस डॉक्टर डॉ. पवन तिवारी ने पहले बच्चे का एक्स-रे कराया, लेकिन इसके बाद स्वयं इलाज करने के बजाय एक्स-रे फिल्म को मोबाइल फोन के जरिए व्हाट्सएप पर दूसरे डॉक्टर को भेजकर राय ली।
बताया जा रहा है कि ओपीडी में मौजूद डॉक्टर सौरभ चंद्राकर से फोन पर मिली सलाह के आधार पर ही डॉ. पवन तिवारी ने बच्चे के हाथ में प्लास्टर लगा दिया। परिजनों का कहना है कि प्लास्टर लगाने के बाद भी कई दिनों तक बच्चे के हाथ में तेज दर्द, सूजन और कमजोरी बनी रही, जिससे हड्डी के सही तरीके से न जुड़ने की आशंका लगातार बनी रही।
गुरुवार को जब परिजन बच्चे को पुनः आस्था अस्पताल लेकर पहुंचे और प्लास्टर खोला गया, तो फ्रैक्चर की स्थिति पहले जैसी ही पाई गई। परिजनों का आरोप है कि एक नजर में ही बच्चे की हाथ की हड्डी तिरछी नजर आ रही थी, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।
इस पूरे मामले को लेकर परिजन बेहद परेशान हैं और उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से शिकायत कर जांच की मांग की है। साथ ही बच्चे को किसी योग्य आर्थोपेडिक विशेषज्ञ से तत्काल इलाज उपलब्ध कराने की मांग की गई है। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते सही उपचार नहीं मिला, तो बच्चे के हाथ को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।







