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बीएचयू के वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि: 10 सेकेंड में बताएगा हार्ट अटैक का खतरा, साइलेंट अटैक की होगी समय पर पहचान

gmedianews24.com/नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ते हृदय रोगों और साइलेंट हार्ट अटैक के मामलों के बीच काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। बीएचयू के रसायन विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने एक अत्याधुनिक इम्पेडिमेट्रिक नैनो-सेंसर विकसित किया है, जो रक्त में मौजूद सी-रिएक्टिव प्रोटीन (CRP) के स्तर को बेहद सटीकता और कुछ ही सेकेंड में मापने में सक्षम है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, सीआरपी को हृदय संबंधी रोगों का प्रमुख संकेतक माना जाता है। अब तक इसकी जांच की प्रक्रिया महंगी और समय लेने वाली थी, लेकिन बीएचयू का यह नया सेंसर महज 10 सेकेंड में परिणाम देगा। खास बात यह है कि यह सेंसर 0.5 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर जैसे बेहद कम स्तर पर भी सीआरपी की पहचान कर सकता है और 0.5 से 400 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर तक के सामान्य और उच्च जोखिम स्तरों की जांच कर सकेगा।

मालिक्यूलर इम्प्रिंटेड पॉलिमर से बढ़ी सटीकता
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसमें इस्तेमाल किया गया मालिक्यूलर इम्प्रिंटेड पॉलिमर (MIP) है, जिसे ‘आर्टिफिशियल एंटीबॉडी’ कहा जाता है। यह पॉलिमर खास तौर पर केवल सीआरपी अणुओं को पकड़ने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके साथ बिस्मथ-युक्त कोबाल्ट फेराइट नैनोकणों का उपयोग कर सेंसर की संवेदनशीलता को और बढ़ाया गया है।

शोधकर्ताओं ने विशेष कार्यात्मक मोनोमर 4-नाइट्रोफेनिल मेथाक्रायलेट और क्रॉस-लिंकर की मदद से इस सेंसर को तैयार किया है। इसे इंडियम टिन ऑक्साइड (ITO) इलेक्ट्रोड पर इलेक्ट्रोफोरेटिक डिपोजिशन प्रक्रिया के माध्यम से विकसित किया गया है।

हृदय रोग से होने वाली मौतों पर लग सकती है लगाम
विशेषज्ञों का कहना है कि देश में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण हृदय रोग है। ऐसे में समय पर और सटीक जांच सैकड़ों-हजारों लोगों की जान बचा सकती है। यह इलेक्ट्रोकेमिकल सेंसर भविष्य में क्लिनिक और अस्पतालों में हृदय रोगों की जांच को अधिक सुलभ, तेज और किफायती बना सकता है।

अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध
इस महत्वपूर्ण शोध को यूनाइटेड किंगडम के प्रतिष्ठित जर्नल ‘जर्नल ऑफ मैटेरियल्स केमिस्ट्री बी’ में प्रकाशित किया गया है। शोध टीम में बीएचयू के रसायन विज्ञान विभाग के डॉ. जय सिंह, सैम हिगिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय प्रयागराज की डॉ. नीलोत्तमा सिंह, तथा शोधार्थी सिद्धिमा सिंह और आस्था सिंह शामिल हैं।

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