
gmedianews24.com/पेरिस/वॉशिंगटन। ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड पर कब्जे से जुड़े बयान का सबसे कड़ा विरोध फ्रांस कर रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा खुलकर विरोध किए जाने से ट्रंप नाराज हो गए हैं। इसी नाराजगी का नतीजा माना जा रहा है कि ट्रंप ने फ्रांसीसी शराब पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दे दी है। इसके बाद यह मुद्दा अब सीधे ट्रंप बनाम मैक्रों की सियासी टकराव में बदल गया है।
मैक्रों का करारा जवाब: धमकी नहीं, सम्मान में भरोसा
फ्रांसीसी शराब पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी पर राष्ट्रपति मैक्रों ने भी तीखा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि फ्रांस धमकियों में नहीं, सम्मान और आपसी विश्वास में भरोसा करता है।
मैक्रों यह बयान स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान दे रहे थे।
उन्होंने ग्रीनलैंड विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि यूरोप पर पाबंदियां लगाने की धमकी देना गलत है, खासकर तब जब इनका इस्तेमाल किसी देश की जमीन और आजादी पर दबाव बनाने के लिए किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि ऐसी स्थिति को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय कानून की अनदेखी खतरनाक
मैक्रों ने कहा कि ऐसी दुनिया बेहद खतरनाक है, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून की कोई अहमियत न रहे। जहां ताकतवर देश मनमानी करें और कमजोर देशों को मजबूरी में सब कुछ सहना पड़े। उन्होंने चेताया कि यह सोच वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है।
बिना नाम लिए अमेरिका पर साधा निशाना
अपने भाषण में मैक्रों ने व्यापार और टैरिफ का मुद्दा भी उठाया और बिना नाम लिए अमेरिका पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ देश ऐसे व्यापार समझौते कर रहे हैं, जो यूरोप के कारोबार को नुकसान पहुंचाते हैं, ज्यादा शर्तें थोपते हैं और यूरोप को कमजोर करने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने कहा कि लगातार नए-नए टैक्स लगाए जा रहे हैं और जब इनका इस्तेमाल किसी देश की जमीन और संप्रभुता पर दबाव बनाने के लिए हो, तो यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।
आजादी और संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं
मैक्रों ने स्पष्ट किया कि फ्रांस अपनी आजादी और संप्रभुता को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कहा कि यह कोई पुरानी सोच नहीं, बल्कि द्वितीय विश्व युद्ध से मिली सीख को याद रखने का तरीका है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर सहयोग जरूरी है और देश आपस में मिलकर ही आगे बढ़ सकते हैं।
“यह समय शांति का है”… और हंसी गूंज उठी
मैक्रों ने अपने भाषण के दौरान कहा, “यह समय शांति, स्थिरता और भरोसे का होना चाहिए।” इस पर हॉल में मौजूद लोग हंस पड़े। इसके बाद मैक्रों ने भी माना कि हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया तेजी से अस्थिर होती जा रही है—चाहे सुरक्षा का मामला हो या अर्थव्यवस्था का। वर्ष 2024 में दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध चल रहे हैं और कई देशों में लोकतंत्र कमजोर होकर तानाशाही की ओर बढ़ रहा है।







