[metaslider id="31163"]
Featuredदेश

विधानसभा में हंगामा, राज्यपाल आर. एन. रवि ने संबोधन के बिना किया सदन का बहिष्कार

gmedianews24.com/चेन्नई/नई दिल्ली: तमिलनाडु विधानसभा में आज उस समय हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला जब राज्यपाल आर. एन. रवि ने सत्र की शुरुआत में अपना पारंपरिक अभिभाषण दिए बिना ही सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। राज्यपाल ने आरोप लगाया कि राष्ट्रगान को उचित सम्मान नहीं दिया जा रहा है और बार-बार अनुरोध के बावजूद सरकार ने सत्र की शुरुआत राष्ट्रगान से करने की परंपरा को स्वीकार नहीं किया।

विवाद की मुख्य वजह

नियमों के मुताबिक, तमिलनाडु विधानसभा की कार्यवाही की शुरुआत राज्य गीत ‘तमिल थाई वाजथु’ से होती है और समापन राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ से किया जाता है। राज्यपाल आर. एन. रवि की मांग थी कि:

  • सत्र की शुरुआत में ही राष्ट्रगान बजाया जाए।

  • संबोधन के दौरान बीच में बाधा न डाली जाए।

जब स्पीकर एम. अप्पावु ने सदन की पुरानी परंपराओं का हवाला देते हुए इसे बदलने से इनकार कर दिया, तो राज्यपाल ने संबोधन पढ़ने से मना कर दिया और सदन से बाहर चले गए।

राजभवन की प्रेस रिलीज: “माइक बंद किया गया”

घटना के तुरंत बाद राजभवन की ओर से एक तीखी प्रेस रिलीज जारी की गई। इसमें राज्यपाल के वॉकआउट के निम्नलिखित कारण बताए गए:

  1. राष्ट्रगान का अपमान: राजभवन ने कहा कि राष्ट्रगान को संबोधन के अंत के बजाय शुरुआत में भी बजाया जाना चाहिए, जिसे सरकार ने अनसुना कर दिया।

  2. अभिव्यक्ति पर रोक: आरोप लगाया गया कि संबोधन के दौरान राज्यपाल का माइक बार-बार बंद (Switch off) किया गया ताकि वे अपनी बात न रख सकें।

  3. तथ्यों की अनदेखी: राजभवन के अनुसार, सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण में दलितों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों जैसे गंभीर मुद्दों को पूरी तरह दरकिनार किया गया था।

मुख्यमंत्री और स्पीकर की प्रतिक्रिया

राज्यपाल के बाहर जाने के बाद मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें राज्यपाल के इस कदम की निंदा की गई और सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण को ही रिकॉर्ड पर लेने की बात कही गई।

  • स्पीकर एम. अप्पावु ने कहा, “विधानसभा की अपनी परंपराएं हैं जो दशकों से चली आ रही हैं। राज्यपाल को सदन के नियमों का पालन करना चाहिए न कि अपनी नई शर्तें थोपनी चाहिए।”

  • मुख्यमंत्री ने राज्यपाल के व्यवहार को ‘बचकाना’ और उच्च संवैधानिक पद की गरिमा के खिलाफ बताया।

तीसरी बार बहिष्कार का रिकॉर्ड

यह लगातार तीसरी बार है (2024, 2025 और अब 2026) जब राज्यपाल आर. एन. रवि ने विधानसभा में अपना पूरा भाषण नहीं पढ़ा। इससे पहले 2023 में भी उन्होंने भाषण के कुछ हिस्सों को छोड़ दिया था, जिस पर काफी विवाद हुआ था।

Related Articles

Back to top button