
gmedianews24.com/नई दिल्ली। हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में घर को मंदिर के समान पवित्र माना गया है। इसी कारण घर के पूजा स्थल पर देवी-देवताओं की मूर्तियां विधि-विधान से स्थापित की जाती हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या घर में एक ही भगवान की कई मूर्तियां रखना शुभ होता है या नहीं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, एक ही देवता की एक से अधिक मूर्तियां रखना वर्जित माना गया है।
एक ही देवता की कई मूर्तियां क्यों नहीं रखनी चाहिए?
वास्तु शास्त्र में घर को ऊर्जा का केंद्र माना गया है। मान्यता है कि जब एक ही देवता की दो या अधिक मूर्तियां एक स्थान पर रखी जाती हैं, तो उनकी ऊर्जा आपस में टकराने लगती है। इससे घर में नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकता है और मानसिक असंतुलन, भ्रम या तनाव की स्थिति बन सकती है। उदाहरण के तौर पर, कहा जाता है कि घर में दो गणेश जी की मूर्तियां होने से बुद्धि और निर्णय क्षमता में भ्रम आ सकता है।
एक देवता, एक मूर्ति, एक आसन का सिद्धांत
शास्त्रों में स्पष्ट रूप से कहा गया है—एक देवता, एक मूर्ति और एक आसन। इस नियम के अनुसार, एक ही देवता की कई मूर्तियां रखने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, दो हनुमान जी की मूर्तियां होने से घर में अनावश्यक क्रोध और तनाव बढ़ सकता है, जबकि दो लक्ष्मी जी की मूर्तियां धन के प्रवाह में बाधा उत्पन्न कर सकती हैं।
इन देवी-देवताओं की केवल एक मूर्ति ही रखें
वास्तु और पुराणों के अनुसार, घर में दो शिवलिंग या दो शिव मूर्तियां होने से पारिवारिक अशांति बढ़ती है। वहीं भगवान विष्णु की दो मूर्तियां होने पर वैवाहिक या संतान सुख में कमी आ सकती है। इसलिए घर में भगवान गणेश, शिव, विष्णु, कृष्ण, माता लक्ष्मी और हनुमान जी की केवल एक-एक मूर्ति ही स्थापित करनी चाहिए। यदि पुरानी मूर्ति खंडित या खराब हो जाए, तो पहले उसका विधिवत विसर्जन करें, उसके बाद ही नई मूर्ति स्थापित करें।
किन देवताओं की जोड़ी में मूर्तियां रखना शुभ है?
कुछ देवी-देवताओं की मूर्तियां जोड़ी में रखना वास्तु के अनुसार शुभ माना गया है। जैसे—माता दुर्गा या काली, भगवान राम, राधा-कृष्ण या बाल गोपाल की मूर्तियां जोड़े में रखी जा सकती हैं। इनकी जोड़ी न केवल अनुमत है, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-शांति बढ़ाने वाली मानी जाती है।
मूर्ति स्थापना के सामान्य वास्तु नियम
वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा स्थान घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में होना चाहिए। मूर्ति का मुख पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है, जबकि दक्षिण मुख वाली मूर्तियां घर में नहीं रखनी चाहिए। साथ ही मूर्ति का आकार संतुलित होना चाहिए—बहुत बड़ी या बहुत छोटी मूर्ति रखने से बचना चाहिए।







