
gmedianews24.com/नई दिल्ली/लंदन। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी स्टील कंपनी आर्सेलर मित्तल के मालिक और ‘स्टील किंग’ लक्ष्मी मित्तल के पिता, वरिष्ठ उद्योगपति मोहनलाल मित्तल का 15 जनवरी 2026 को लंदन में निधन हो गया। वे 99 वर्ष के थे और कुछ ही महीनों में 100 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले थे। उन्होंने परिवार के बीच शांतिपूर्वक अंतिम सांस ली। उनके निधन से उद्योग जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
आर्सेलर मित्तल के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन लक्ष्मी मित्तल ने अपने पिता के निधन की जानकारी साझा करते हुए कहा कि उनके पिता एक असाधारण इंसान थे, जिनकी मेहनत, सादगी और मजबूत धार्मिक आस्था जीवनभर उनके साथ रही। उन्होंने कहा कि अपार कारोबारी सफलता के बावजूद उनके पिता जमीन से जुड़े रहे और परिवार, रिश्तों व मानवीय मूल्यों को हमेशा प्राथमिकता दी।
लक्ष्मी मित्तल ने बताया कि उनके पिता राजस्थान के छोटे से गांव राजगढ़ से थे और बेहद साधारण परिवार में जन्मे थे। बचपन से ही उन्होंने अपने हालात से ऊपर उठने का संकल्प लिया था। उन्हें कड़ी मेहनत पर पूरा विश्वास था और वे मानते थे कि सफलता की सबसे बड़ी कुंजी परिश्रम है। पढ़ाई के दौरान भी उनकी खास रुचि कॉमर्स में रही, जिसने आगे चलकर एक विशाल उद्योग साम्राज्य की नींव रखी।
पीएम मोदी समेत कई हस्तियों ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्योगपति मोहनलाल मित्तल के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। पीएम मोदी ने कहा कि मोहनलाल मित्तल उद्योग जगत में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले व्यक्ति थे और भारतीय संस्कृति के प्रति उनका विशेष लगाव था। उन्होंने समाज की प्रगति के लिए कई परोपकारी कार्य किए। प्रधानमंत्री ने उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुखद घड़ी में वह मित्तल परिवार के साथ हैं।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी शोक जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “मोहनलाल मित्तल जी के निधन से दुखी हूं। एक जाने-माने इंडस्ट्रियलिस्ट के रूप में उन्होंने मजबूत बिजनेस विरासत की नींव रखी और उद्यम जगत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। दुख की इस घड़ी में उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ओम शांति।”
राजस्थान भाजपा के वरिष्ठ नेता सतीश पूनिया ने भी उनके निधन को उद्योग जगत के एक युग का अंत बताया। उन्होंने कहा कि चूरू जिले के सादुलपुर कस्बे में जन्मे मोहनलाल मित्तल ने एक छोटे से गांव से निकलकर पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई।
परिवार और विरासत
मोहनलाल मित्तल अपने पीछे पत्नी, पांच बच्चे, 11 पोते-पोतियां और 22 परपोते छोड़ गए हैं। वे परिवार और दोस्तों के बेहद करीब थे और जीवन के हर छोटे-बड़े अवसर को साथ मनाने में विश्वास रखते थे। उनका जीवन संघर्ष, मेहनत, सादगी और मूल्यों का प्रतीक माना जाता है।







