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US-Iran Tension: खाड़ी देशों की कूटनीति से टला बड़ा युद्ध, ट्रंप ने ईरान पर हमला टाला

gmedianews24.com/वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़े सैन्य टकराव का खतरा फिलहाल टल गया है। 10 बार तक ईरान पर हमले की धमकी देने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। सऊदी अरब, कतर और ओमान की कूटनीतिक कोशिशों के चलते अमेरिका ने ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को रोक दिया है। इससे मध्य पूर्व में एक बड़े युद्ध जैसे हालात बनने से बचाव हुआ है।

खाड़ी देशों के अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि सऊदी अरब, कतर और ओमान ने अंतिम समय में हस्तक्षेप करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान पर हमला न करने के लिए मना लिया। इन देशों ने ट्रंप को यह समझाने के लिए “आखिरी वक्त में कड़ा संघर्ष” किया, ताकि ईरान को अपनी मंशा स्पष्ट करने और हालात को शांत करने का एक मौका मिल सके।

ईरान में 20 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन

गौरतलब है कि ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को सत्ता से बेदखल करने की मांग को लेकर बीते 20 दिनों से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन चल रहे हैं। हिंसा और सरकारी कार्रवाई में अब तक 3 हजार से ज्यादा लोगों की मौत होने की खबर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए ईरान को सैन्य कार्रवाई की धमकी दी थी।

ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका ने अपने नौसैनिक युद्धपोत USS अब्राहम लिंकन कैरियर को भी क्षेत्र की ओर रवाना किया था। हालांकि सऊदी अरब, कतर और ओमान की मध्यस्थता के बाद ट्रंप ने फिलहाल हमला टालने का फैसला लिया है।

‘विनाशकारी परिणामों’ की चेतावनी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप को समझाया गया कि ईरान पर हमला पूरे क्षेत्र के लिए ‘विनाशकारी परिणाम’ ला सकता है। अधिकारी ने इस कूटनीतिक प्रयास को “बमों को डिफ्यूज करने वाली एक अनिद्रा भरी रात” बताया।

खाड़ी देशों ने न सिर्फ वॉशिंगटन से संपर्क साधा, बल्कि ईरान को भी सख्त संदेश दिया कि यदि उसने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया, तो उसके क्षेत्रीय देशों के साथ संबंध हमेशा के लिए खराब हो सकते हैं।

अल-उदेद एयरबेस पर हालात सामान्य

तनाव के चरम पर होने के दौरान कतर स्थित मिडिल ईस्ट के सबसे बड़े अमेरिकी सैन्य अड्डे अल-उदेद एयरबेस पर सुरक्षा स्तर बढ़ा दिया गया था और कुछ सैन्य कर्मियों को वहां से हटने के निर्देश दिए गए थे।

हालांकि कूटनीतिक बातचीत के सफल होने के बाद बुधवार शाम से हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे हैं। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, अब सैन्य विमान और कर्मी अपनी पुरानी तैनाती पर लौट रहे हैं और सुरक्षा अलर्ट का स्तर भी कम कर दिया गया है।

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