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चुनाव से पहले ED की सक्रियता पर सवाल, बंगाल में छापेमारी को लेकर सियासी घमासान तेज

gmedianews24.com/कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बढ़ती सक्रियता को लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल खड़े हो रहे हैं। आर्थिक अपराधों, काले धन और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करने वाली ED की कार्रवाई की टाइमिंग को लेकर विपक्षी दल लगातार संदेह जता रहे हैं। ताजा मामला कोलकाता में चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC से जुड़े ठिकानों पर की गई छापेमारी का है, जिसे लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और ED आमने-सामने आ गई हैं।

बंगाल में इस साल मई से पहले विधानसभा चुनाव होने प्रस्तावित हैं। ऐसे में चुनावी माहौल के बीच हुई इस कार्रवाई ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल चुनाव से पहले दबाव बनाने और राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है, जबकि ED का कहना है कि वह कानून के दायरे में रहकर अपनी जिम्मेदारी निभा रही है।

गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है जब चुनाव से ठीक पहले ED की कार्रवाई चर्चा में आई हो। बीते चार वर्षों में झारखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे तीन राज्यों में भी ऐसे उदाहरण सामने आ चुके हैं, जहां पुराने मामलों में चुनाव से कुछ समय पहले ED ने बड़ी कार्रवाई की थी। इन घटनाओं के बाद से ही एजेंसी की भूमिका और निष्पक्षता को लेकर बहस तेज होती रही है।

इस साल पश्चिम बंगाल के साथ-साथ तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। इसी कड़ी में इन राज्यों में भी ED द्वारा पुराने मामलों की फाइलें खोलने और जांच तेज किए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी मौसम में ऐसी कार्रवाइयों से एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

फिलहाल बंगाल में ED की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जहां एक ओर तृणमूल कांग्रेस इसे लोकतंत्र पर हमला बता रही है, वहीं भाजपा का कहना है कि भ्रष्टाचार पर कार्रवाई को चुनाव से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बंगाल की चुनावी राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।

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