
gmedianews24.com/तेहरान/वॉशिंगटन। गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे ईरान में शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन अब खुलकर सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और इस्लामी शासन के खिलाफ बगावत में बदल गए हैं। बीते 16 दिनों से पूरे देश में लाखों लोग सड़कों पर उतरकर सरकार विरोधी नारेबाजी कर रहे हैं। राजधानी तेहरान समेत लगभग सभी प्रमुख शहरों में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
8 जनवरी से देशभर में इंटरनेट बंद होने के बावजूद प्रदर्शनकारी लगातार डटे हुए हैं। इसी बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका कभी भी ईरान पर हमला कर सकता है, जिसे लेकर पश्चिम एशिया में हलचल तेज हो गई है।
खामेनेई सरकार का सख्त रुख
बढ़ते जनआक्रोश को देखते हुए ईरान की सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शन में शामिल लोगों को ‘खुदा का दुश्मन’ माना जाएगा। ईरान के कानून के तहत इस आरोप में मौत की सजा तक का प्रावधान है।
अमेरिका के हमले पर मंथन
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमलों (एयरस्ट्राइक) की संभावनाओं का आकलन कर रहा है।
हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि फिलहाल किसी भी तरह की सैन्य तैनाती या हथियारों की आवाजाही नहीं की गई है। यह केवल संभावित हालात के लिए तैयार की जा रही रणनीति है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की योजनाएं राष्ट्रीय सुरक्षा प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा होती हैं और इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका तुरंत हमला करेगा।
217 प्रदर्शनकारियों की मौत का दावा
प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की भयावह तस्वीरें भी सामने आ रही हैं। टाइम मैगजीन ने तेहरान के एक डॉक्टर के हवाले से बताया कि राजधानी के सिर्फ छह अस्पतालों में अब तक 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है। इनमें से अधिकांश की मौत गोली लगने से हुई है।




