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धान संग्रहण केंद्र से 18 हजार क्विंटल धान गायब, चूहे-दीमक को ठहराया जिम्मेदार, 5.71 करोड़ के नुकसान पर उठे सवाल

gmedianews24.com/रायपुर। कबीरधाम जिले के बाद अब महासमुंद जिले के बागबाहरा स्थित धान संग्रहण केंद्र से बड़े पैमाने पर धान गायब होने का मामला सामने आया है। यहां करीब 18 हजार 433 क्विंटल धान का स्टॉक कम पाया गया है। संग्रहण केंद्र के संचालकों ने इस कमी के लिए चूहे, दीमक और चिड़ियों को जिम्मेदार ठहराया है। संचालकों के दावे के अनुसार इन्हीं कारणों से सरकार को लगभग 5.71 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

संचालकों के इस तर्क ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो दावा यह बनता है कि ये जीव करीब 10 महीने तक लगातार हर घंटे लगभग 256 किलो धान खाते रहे। ऐसे में वास्तविकता संचालकों के दावों से अलग नजर आ रही है और मामला कीट-जानवरों से अधिक भ्रष्टाचार और लापरवाही का प्रतीत हो रहा है।

करोड़ों खर्च के बावजूद सुरक्षा पर सवाल

धान के सुरक्षित भंडारण के लिए प्रशासन द्वारा मार्कफेड के माध्यम से हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं। इसमें परिवहन भाड़ा, हमाली, सुरक्षा उपकरण और रखरखाव की व्यवस्था शामिल होती है। इसके बावजूद इतने बड़े पैमाने पर धान का गायब होना सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

नियमों के बावजूद कार्रवाई नहीं

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव द्वारा 12 सितंबर 2025 को जारी पत्र के अनुसार—

  • 1% तक कमी होने पर कारण बताओ नोटिस,

  • 1% से 2% कमी पर विभागीय जांच,

  • और 2% से अधिक कमी होने पर तत्काल निलंबन, विभागीय जांच एवं एफआईआर दर्ज करने के निर्देश हैं।

बागबाहरा संग्रहण केंद्र में 3.65 प्रतिशत शॉर्टेज दर्ज होने के बावजूद अब तक न तो निलंबन हुआ और न ही एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

10 महीने तक रुका रहा धान: प्रभारी

बागबाहरा धान संग्रहण केंद्र के प्रभारी ने बताया कि वर्ष 2024-25 में केंद्र में 12.63 लाख बोरा धान की आवक हुई थी। आवक के समय धान में 17 प्रतिशत नमी थी, जबकि जावक के समय यह 10-11 प्रतिशत रह गई। प्रभारी का दावा है कि दीमक, कीट, चूहे और पक्षियों के कारण नुकसान हुआ, साथ ही बारिश और कीचड़ से भी धान खराब हुआ। केंद्र में धान लगभग 10 महीने तक पड़ा रहा, जिसके चलते 3.65 प्रतिशत की कमी आई है। प्रभारी के अनुसार विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया है और नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर ने मांगी जानकारी

महासमुंद कलेक्टर विनय लंगेह ने कहा कि फिलहाल उन्हें इस मामले की विस्तृत जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि मार्कफेड के डीएमओ से जानकारी ली जाएगी और यदि कहीं गड़बड़ी पाई जाती है, तो नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

रायपुर। कबीरधाम जिले के बाद अब महासमुंद जिले के बागबाहरा स्थित धान संग्रहण केंद्र से बड़े पैमाने पर धान गायब होने का मामला सामने आया है। यहां करीब 18 हजार 433 क्विंटल धान का स्टॉक कम पाया गया है। संग्रहण केंद्र के संचालकों ने इस कमी के लिए चूहे, दीमक और चिड़ियों को जिम्मेदार ठहराया है। संचालकों के दावे के अनुसार इन्हीं कारणों से सरकार को लगभग 5.71 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

संचालकों के इस तर्क ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो दावा यह बनता है कि ये जीव करीब 10 महीने तक लगातार हर घंटे लगभग 256 किलो धान खाते रहे। ऐसे में वास्तविकता संचालकों के दावों से अलग नजर आ रही है और मामला कीट-जानवरों से अधिक भ्रष्टाचार और लापरवाही का प्रतीत हो रहा है।

करोड़ों खर्च के बावजूद सुरक्षा पर सवाल

धान के सुरक्षित भंडारण के लिए प्रशासन द्वारा मार्कफेड के माध्यम से हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं। इसमें परिवहन भाड़ा, हमाली, सुरक्षा उपकरण और रखरखाव की व्यवस्था शामिल होती है। इसके बावजूद इतने बड़े पैमाने पर धान का गायब होना सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

नियमों के बावजूद कार्रवाई नहीं

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव द्वारा 12 सितंबर 2025 को जारी पत्र के अनुसार—

  • 1% तक कमी होने पर कारण बताओ नोटिस,

  • 1% से 2% कमी पर विभागीय जांच,

  • और 2% से अधिक कमी होने पर तत्काल निलंबन, विभागीय जांच एवं एफआईआर दर्ज करने के निर्देश हैं।

बागबाहरा संग्रहण केंद्र में 3.65 प्रतिशत शॉर्टेज दर्ज होने के बावजूद अब तक न तो निलंबन हुआ और न ही एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

10 महीने तक रुका रहा धान: प्रभारी

बागबाहरा धान संग्रहण केंद्र के प्रभारी ने बताया कि वर्ष 2024-25 में केंद्र में 12.63 लाख बोरा धान की आवक हुई थी। आवक के समय धान में 17 प्रतिशत नमी थी, जबकि जावक के समय यह 10-11 प्रतिशत रह गई। प्रभारी का दावा है कि दीमक, कीट, चूहे और पक्षियों के कारण नुकसान हुआ, साथ ही बारिश और कीचड़ से भी धान खराब हुआ। केंद्र में धान लगभग 10 महीने तक पड़ा रहा, जिसके चलते 3.65 प्रतिशत की कमी आई है। प्रभारी के अनुसार विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया है और नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर ने मांगी जानकारी

महासमुंद कलेक्टर विनय लंगेह ने कहा कि फिलहाल उन्हें इस मामले की विस्तृत जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि मार्कफेड के डीएमओ से जानकारी ली जाएगी और यदि कहीं गड़बड़ी पाई जाती है, तो नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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