
gmedianews24.com/नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो (IndiGo Airlines) इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही है। क्रू की कमी के चलते हजारों उड़ानों के रद्द होने के बाद अब कंपनी को एक और बड़ा झटका लगा है। दिल्ली साउथ कमिश्नरेट के CGST विभाग ने इंडिगो पर ₹458 करोड़ से अधिक का GST जुर्माना लगाया है।
जानकारी के मुताबिक, CGST के अतिरिक्त आयुक्त द्वारा यह जुर्माना केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) अधिनियम, 2017 की धारा 74 के तहत लगाया गया है। यह कार्रवाई वित्त वर्ष 2018-19 से 2022-23 की असेसमेंट से संबंधित है। कुल GST मांग ₹458,26,16,980 बताई गई है।
कंपनी ने आदेश को बताया गलत
इंडिगो ने इस आदेश को कानून के खिलाफ बताते हुए इसे कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। एयरलाइन के अनुसार, GST विभाग ने विदेशी सप्लायर से प्राप्त क्षतिपूर्ति (कंपनसेशन) पर टैक्स, ब्याज और जुर्माना लगाया है, साथ ही इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को भी खारिज कर दिया गया है।
कंपनी ने बाहरी टैक्स सलाहकारों की राय के आधार पर कहा कि यह GST मांग गलत है और नियमों के अनुरूप नहीं है। इंडिगो का दावा है कि इस आदेश का उसके वित्तीय नतीजों, संचालन या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
क्रू की कमी से बिगड़ा ऑपरेशन
गौरतलब है कि नवंबर और दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो को बड़े पैमाने पर परिचालन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा पायलटों के लिए नए ‘फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट’ (FDTL) नियम लागू किए जाने के बाद एयरलाइन अपने क्रू और रोस्टर को समय पर मैनेज नहीं कर पाई। इसके चलते करीब 5,000 उड़ानें रद्द या विलंबित हुईं, जिससे हजारों यात्री प्रभावित हुए।
DGCA ने लगाई सख्ती, विंटर शेड्यूल में 10% कटौती
यात्रियों की भारी परेशानी के बाद DGCA ने इंडिगो के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए विंटर शेड्यूल में 10 प्रतिशत की कटौती का आदेश दिया था। इसका उद्देश्य एयरलाइन के ऑपरेशन्स को दोबारा पटरी पर लाना था। साथ ही एक जांच समिति ने अपनी गोपनीय रिपोर्ट भी मंत्रालय को सौंपी है, जिसमें इंडिगो की योजना और प्रबंधन में खामियों का उल्लेख होने की संभावना है।
पहले भी लग चुका है भारी जुर्माना
यह पहला मौका नहीं है जब इंडिगो पर टैक्स विवाद सामने आया हो। इससे पहले मार्च में इनकम टैक्स विभाग ने कंपनी पर ₹944.20 करोड़ का पेनाल्टी ऑर्डर जारी किया था। यह जुर्माना असेसमेंट ईयर 2021-22 के लिए इनकम टैक्स एक्ट की धारा 270A के तहत लगाया गया था। इसके अलावा, चेन्नई के संयुक्त आयुक्त द्वारा ₹2.84 करोड़ का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया गया था, जो 2018 से 2020 के वित्तीय रिकॉर्ड में इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े विवाद से संबंधित है।




