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छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड का कहर: अंबिकापुर में 4.5 डिग्री तक गिरा पारा, बच्चों में बढ़े हाइपोथर्मिया के मामले

gmedianews24.com/रायपुर। छत्तीसगढ़ में इस बार ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ असर दिखाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में शीतलहर का प्रकोप साफ नजर आ रहा है। अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान गिरकर 4.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि हिल स्टेशन मैनपाट में बर्फ की चादर जमने से ठिठुरन और बढ़ गई है। मैदानी इलाकों में भी न्यूनतम तापमान 9 से 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है।

बच्चों की सेहत पर बढ़ा खतरा

कड़ाके की ठंड का सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं पर पड़ रहा है। बीते एक महीने में रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल समेत निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। डॉक्टरों के अनुसार, ठंड से बचाव में थोड़ी सी लापरवाही बच्चों की सेहत के लिए गंभीर साबित हो सकती है।

नवजातों में ज्यादा जोखिम

बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में जल्दी ठंडा हो जाता है। नवजात शिशुओं की मांसपेशियां पूरी तरह विकसित नहीं होतीं, जिससे वे ठंड सहन नहीं कर पाते। खासकर सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे शिशुओं में हाइपोथर्मिया का खतरा अधिक रहता है।

NICU और SNCU में बढ़ रही भर्ती

डॉक्टरों के मुताबिक, पर्याप्त सावधानी नहीं बरतने पर बच्चों को एनआईसीयू (NICU) और एसएनसीयू (SNCU) में भर्ती कर इलाज करना पड़ रहा है। नवजात का शरीर अचानक ठंडा पड़ जाना या शरीर का तापमान सामान्य से कम हो जाना हाइपोथर्मिया का प्रमुख लक्षण है।

डॉक्टरों की सलाह

विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों को गर्म कपड़ों में रखें, रात के समय ठंडी हवा से बचाएं और नवजातों के शरीर का तापमान नियमित रूप से जांचते रहें। किसी भी तरह के असामान्य लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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